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रेलवे दबा कर बैठा है सीकर से रींगस तक रेल चलाने का प्रस्ताव



सीकर। सीकर-रींगस ट्रेक पर रेल चलाने को लेकर रेलवे विभाग और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है। इस ट्रेक पर रेल चलाने का प्रस्ताव पिछले दो माह से रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय धूल फांक रहा है। डीआरएम से स्वीकृत इस प्रस्ताव के अनुसार रेल चलाने के लिए रेलवे को कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं करनी है। सीकर में खड़े रहने वाले डीएमयू और दिल्ली जाने वाले ट्रेक को ही रींगस तक चलाया जा सकता है। प्रताव में डीएमयू और स्पेशल ट्रेन का समय भी निर्धारित है किया गया है, जिससे सीकर से रींगस जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ सीकर से चूरू और दिल्ली की गाडिय़ां भी यथावत चल सकेगी।

 

सीकर के स्टेशन पर खड़ी रहती है रेल

सीकर से चूरू चलने वाले डीएमयू और लोहारू और दिल्ली जाने वाली ट्रेन का यहां लम्बे समय तक ठहराव रहता है। एक डीएमयू रात भर यहां और दूसरा चूरू में खड़ा रहता है। दिल्ली जाने वाली टे्रन तीन दिन तक 16 घंटे रेलवे स्टेशन खड़ी रहती है। सीकर-पलसाना और रींगस ट्रेक निर्माण पूरा होने के बाद 26 अक्टूबर को सीआरस भी हो गया। इसके बाद रींगस में प्लेटफार्म नंबर एक और दो कालेकिन इस ट्रेक पर अभी तक एक भी गाड़ी नहीं चल पाई है।

सवा घंटे में पहुंचेगी सीकर से रींगस रेल

रेलवे के प्रस्ताव के अनुसार यहां ट्रेनों के पांच फेरे तय किए गए हैं। इनमें से दो स्पेशल ट्रेन सप्ताह में दो बार चलेगी। डीएमयू ट्रेन सुबह 4 : 45 बजे रवाना होकर छह बजे रींगस पहुंचेगी। वहां से 6: 25 पर रवाना होकर 7: 35 पर वापस सीकर पहुंच जाएगी। दूसरी डीएमयू शाम को 3: 40 पर रवाना होकर पांच बजे रींगस पहुंचेगी। यह ट्रेन 5: 10 पर वापस रवाना होकर 8 : 25 पर सीकर पहुंचेगी। तीसरा डीएमयू रात 8: 25 पर रवाना होकर 9: 55 रींगस पहुंचेगा। डीएमयू ट्रेन का सीकर के बाद गौरिया, राणोली, पलसाना, बावड़ी, सौथलिया और रींगस स्टेशन तय किया गया है। स्पेशल ट्रेन सीकर से सुबह 6: 15 रवाना होकर 7 : 40 पर रींगस पहुंचगी। वहां से 8: 55 बजे वापस रवाना होकर 10: 20 पर वापस सीकर पहुंच जाएगी। दूसरी स्पेशल ट्रेन सुबह 10: 50 पर रवाना होकर 12: 05 पर रींगस पहुंचेगी। वहां से 1: 20 बजे रवाना होकर 2: 40 पर वापस सीकर पहुंच जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार रेल सीकर से रीगस का औसत सवा से डेढ़ घंटे का समय लेगी। स्पेशल ट्रेन राणोली और सौंथलिया नहीं रुकेगी।

 

हजारों यात्रियों की सुविधा के मुद्दे पर ढिलाई

सीकर से रींगस ट्रेक पर रेल चलाने का मामला प्रतिदिन सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा से जुड़ा है। रेलवे के सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर रेलवे मुख्यालय ने तैयार किया है। इसमें ट्रेक पर सीआर से मिली सौ किलोमीटर प्रतिघंटा से ट्रेन की रफ्तार के साथ ट्रेनों के रखरखाव व डीजल लेने का भी ध्यान रखा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति के बाद आगामी कार्रवाई के लिए 5 दिसंबर को उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीटीएम को भेज दिया। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

दो वर्ष से रेल का इंतजार कर रहे हैं लोग


सीकर-रींगस टे्रक पर पिछले दो वर्ष से क्षेत्र के लोग रेल चलने का इंतजार कर रहे हैं। नवंबर 2016 में इस ट्रेक पर मीटरगेज की रेल का आवागमन बंद कर दिया गया। पहले चरण में सीकर से पलसाना तक ट्रेक का कार्य पूरा होने के बाद इस वर्ष फरवरी माह में सीआरएस करवा दिया गया। दूसरे फेज में पलसाना-रींगस तक कार्य पूरा होने के बाद लोगों को इस ट्रेक पर रेल चलने की लोगों को आश बंधी। तीसरे चरण में रींगस से जयपुर का कार्य चल रहा है। इसे पूरा करने की अवधि मार्च 2019 है। लेकिन रेलवे ने नवंबर माह में रींगस में क्रोसिंग का मिलान कर दिया। जिससे सीकर का टे्रक सीधे फुलेरा से जुड़ गया। इसके बाद भी लोगों के रेल चलने के इंतजार की घडिय़ां कम नहीं हो पा रही है।



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