सवाईमाधोपुर. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) से कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दो बाघिनों की शिफ्टिंग को हरी झण्डी मिलने के बाद एक बार फिर से मुकंदरा में बाघिनों के स्वागत की तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां दर्रा रेंज में आरू नदी के पास क्षतिग्रस्त हुई दीवार की मरम्मत की गई है। वहीं बाघ व बाघिनों की सुरक्षा के लिए 180 मीटर लम्बी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया है।
दिसम्बर से अप्रेल के बीच की जानी है शिफ्टिंग
न्यायालय ने दस दिसम्बर को रणथम्भौर से मुकुंदरा बाघिन शिफ्टिंग से लगी रोक हटा दी है। ऐसे में अब एक बार फिर से वन विभाग की ओर से शिफ्टिंग की कवायद शुरू की जाएगी। पूर्व में विभाग ने टी-102 व एक अन्य बाघिन का चयन किया था, लेकिन न्यायालय की रोक के कारण शिफ्टिंग अटक गई थी।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिनों को शिफ्ट करने से पूर्व उन्हें ट्रेकुंलाइज करना पड़ता है। ट्रेकुंलाइज करने से बाघ या बाघिन के शरीर का तापमान बढ़ता है। ऐसे में सर्दी के दिनों में ही बाघिनों की शिफ्टिंग करने की योजना बनाई जा रही है। विभाग की मंशा जनवरी या फरवरी के प्रथम सप्ताह तक शिफ्टिंग का काम पूरा करने की है।
युवा बाघिनों का होगा चयन
विभाग की ओर से शिफ्टिंग के लिए ढाई-तीन साल की युवा बाघिनों का चयन किया जाएगा। उम्रदराज व मां बनने की संभावना वाली बाघिनों को शिफ्टिंग की सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही विभाग ऐसी बाघिन जो लम्बे समय से टेरेटरी की तलाश कर रही हो उनको प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है।
विभाग की ओर से शिफ्टिंग के लिए बाघिनों के चयन के लिए ट्रेकिंग टीमों के गठन की योजना बनाई जा रही है। साथ ही शिफ्टिंग से पूर्व रेडियो कॉलर का प्रबंध भी किया जाएगा। इसके लिए जर्मनी से दो रेडियो कॉलर मंगवाए गए हैं। इनमें से एक रेडियो कॉलर पूर्व में भी जर्मनी से रणथम्भौर पहुंच गया है।
55 किमी टाइगर एरिया का होगा निर्माण
मुकंदरा में बाघ की सुरक्षा के लिए 55 किमी टाइगर एरिया का निर्माण शुरू कर दिया गया है। यहां चौकियां वॉच टावर आदि बनाए जा रहे हैं। वनाधिकारियों के अनुसार मौरू कला, काल्या कुई, घाटी माता मंदिर आदि इलाकों में बारिश के पानी की निकासी के लिए यहां सुरक्षा दीवार की व्यवस्था की गई है। पिछली बार बारिश में सुरक्षा दीवार के क्षतिग्रस्त होने के बाद इस बार अधिकारियों ने पानी की निकासी के लिए सुरक्षा दीवार में कट की व्यवस्था की है।
पूर्व में हो चुके हैं हादसे
गौरतलब है कि मुकुंदरा में कई हादसे हो चुके हैं। गत वर्ष सितम्बर में दर्रा घाटी से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी की चपेट में आने से नाले में गिरे भालू की मौत हो गई थी। मई 2018 में ट्रेन की चपेट में आने से पैंथर की मौत हो गई थी। इससे पूर्व ब्रोकन टेल नाम के टाइगर की भी टे्रन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
ई- सर्विलांस सिस्टम से होगी निगरानी
मुकुंदरा में बाघ-बाघिनों की सुरक्षा व निगरानी के लिए ई-सर्विलांस सिस्टम लगाया गया है। सुरक्षा के लिए वॉच टावर बनाए गए हैं। दर्रा रेंज में इसका नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है। नियंत्रण कक्ष से बाघ बाघिनों की लाइव मूवमेंट पर निगाह रखी जाएगी।
एक नजर में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजव...
759.99 हेक्टेयर कुल एरिया
193.10 हैक्टेयर जवाहर सागर एरिया
213.81 हैक्टेयर दरा सें सेंचुरी एरिया
199.55 हैक्टेयर मुकुंदरा हिल्स एरिया
बाघिनों के लिए रहेगा यह एरिया....
28 हैक्टेयर सॉफ्ट एनक्लोजर
8 हजार हैक्टेयर हार्ड रिलीज एनक्लोजर
मुकंदरा में स्टॉफ की स्थिति...
पद स्वीकृत खाली
एसीएफ 4 2
रेंजर ग्रेड-1 2 2
सीनियर फोरेस्टर 17 1
फोरेस्टर 111 22
असिस्टेंट फोरेस्टर 18 1
इनका कहना है.....
न्यायालय से बाघिन शिफ्टिंग को अनुमति मिलने के बाद मुकुंदरा में तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए यहां सुरक्षा दीवार, वॉचिंग टावर, एनक्लोजर, कंट्रोल रूम आदि का निर्माण किया जा रहा है।
- टी मोहनराज, डीएफओ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व।





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