चौथ का बरवाड़ा. भले ही चौथ का बरवाड़ा को पंचायत समिति का दर्जा प्राप्त हो, लेकिन आज भी कई सुविधाओं का अभाव है। लंबे समय से सुविधाओं के लिए मोहताज चौथ का बरवाड़ा को हर बार नई सरकार से उम्मीद रहती है, लेकिन पांच साल पूरे हो जाते हैं और समस्याएं यथावत रह जाती है।
नगर पालिका का दर्जा, मुंसिफ कोर्ट की मांग
चौथ का बरवाड़ा की आबादी 20 हजार से अधिक होने बाद भी मुख्यालय को नगर पालिका का दर्जा नहीं दिया गया है। इसके साथ ही लोगों की यहां मुंसिफ कोर्ट खोलने की भी मांग है।
साथ ही चौथ का बरवाड़ा मुख्यालय पर विद्युत निगम के सहायक अभियंता का कार्यालय है, लेकिन वह सवाईमाधोपुर में संचालित है। इसका मुख्यालय के लोगों को कार्यालय की सुविधा नहीं मिल रही है। वहीं पुलिस थाने में उपाधीक्षक का पद सृजित हो।
स्वास्थ्य में भी पिछड़ा
चौथ का बरवाड़ा में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा तो मिल गया, लेकिन बिल्डिंग को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपग्रेड नहीं किया गया है। अन्य सुविधाओं में भी बढ़ोतरी नहीं होने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
ऐसे में मरीज मजबूरी में इलाज के लिए सवाईमाधोपुर व अन्य जगह पर जाकर अपना इलाज करवाते हंै। गोरतलब है की स्वास्थय केन्द्र पर कई दिनों से सर्जन का पद रिक्त चल रहा है। इसके साथ ही फार्मासिस्ट अपना डेपुटेशन करवा कर अन्य जगह नौकरी कर रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में कई अपेक्षाएं
चौथ का बरवाड़ा में शिक्षा के नाम एक सरकारी संस्कृत कॉलेज तथा एक आईटीआई कॉलेज है, लेकिन संस्कृत कॉलेज में मूलभूत सुविधा भी नहीं होने से महिला व्याख्याता ने गत दिनों डेपुटेशन करा लिया। सुविधाओं के अभाव में छात्र 12वीं के बाद अन्य शहर को पलायन कर रहे हैं।
पेयजल की समुचित व्यवस्था हो
चौथ का बरवाड़ा में जलदाय विभाग द्वारा पेयजल की समुचित व्यवस्था करने के लिए करोड़ों की राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन आज भी कस्बेवासियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। वहीं कई मोहल्लों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।
रोजगार का अभाव
कस्बे में चौथ माता का प्रसिद्ध मंदिर होने से चौथ का बरवाड़ा को पूरे भारत में जाना जाता है। वहीं राज्य सरकार ने प्रदेश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों में चौथ का बरवाड़ा चौथ माता मंदिर को शामिल किया है, लेकिन यहां के युवा रोजगार को तरस रहे हैं।
यहां अधिकतर लोग कृषि, मजदूरी एवं पशु पालन पर निर्भर है। क्षेत्र में अनियमित बरसात सहित विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के चलते लोगों के पास रोजगार नहीं है। उपखण्ड क्षेत्र में कहीं भी कोई बड़ा उद्योग नहीं है। ऐसे में युवाओं का पलायन अन्य शहरों में हो रहा है।





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