सीकर. स्वाइन फ्लू के रोगी सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिले में रेड अलर्ट घोषित कर कर दिया गया है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नमूने एकत्रित करने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। नमूनों की तत्काल मेडिकल कॉलेजों जांच करवाकर पोजेटिव मरीजों का उपचार शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही स्वाइन फ्लू प्रभावित संबंधित क्षेत्रों में रेपिड रेस्पॉन्स टीमें भिजवाकर सर्वे शुरू कर दिया गया है। सीएमएचओ डॉ अजय चौधरी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता भी
सुरक्षित मातृत्व दिवस पर गर्भवती महिलाओं कि स्क्रीनिंग करवाने के साथ ही स्वाइन फ्लू के बारे में जानकारी देगी। रोकथाम एवं उपचार के व्यवस्थाओं की जिला स्तर पर दैनिक मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं विभाग की टीमों ने कूदन ब्लॉक के गांव ताजसर की केशरदेवी के स्वाइन फ्लू पोजिटिव पाए जाने पर गांव में सर्वे किया। डॉक्टर अनीश के नेतृत्व में टीम ने 50 घरों का सर्वे कर 24 आईएलआईकेस एवं केशरदेवी के परिजनो को टेमीफ्लू दवा दी गई। इस दौरान मास्क वितरित किए गए। केशरदेवी वर्तमान में जयपुर में भर्ती है।
भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर
स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने के लिए विभाग की भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर है। सीएमएचओ डॉ अजय चौधरी ने बताया की स्कूल, हॉस्टल, रैनबसेरों एवं धर्मशाला सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। रेपिड एक्शन टीम का गठन किया गया है। रोकथाम के लिए स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर जांच के साथ ही दवा देना सुनिश्चित किया गया है। जिला अस्पताल पर स्वाइन फ्लू के सैंपल लेने एवं भिजवाने की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू की स्क्रीनिंग, दवाइयों की उपलब्धता, सेंपल एकत्रित करने, जांच की व्यवस्था के साथ आईसोलेशन वार्ड की स्थिति, आईसीयू की व्यवस्था को प्रभारी रखने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
खामियों का अंबार
सीकर. स्वास्थ्य विभाग की 15 टीमे शनिवार को जिले के अस्पतालों का निरीक्षण करने को निकली तो हर जगह खामी नजर आई। कहीं बिना सूचना के चिकित्साकर्मी अवकाश पर थे तो कहीं संक्रमित कचरे का निस्तारण नियमों के तहत नहीं किया जा रहा था। टीमों ने जिले भर में आठ सीएचसी, 20 पीएचसी और 20 सब सेंटर का निरीक्षण किया। सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी ने निरीक्षण के बाद व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पतालों में दवाइयां निर्धारित मानक के अनूसार नहीं थी। लेबर रूम में भी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। मरीजों की पर्चियों की भी इंट्री नहीं की जा रही है। मूवमेंट रजिस्टर का संधारण नही हो रहा। कई कार्मिक बिना सूचना के अनुपस्थिति पाए गए। यहां तक मिली कि छुट्टी स्वीकृत करवाए बिना ही सीएल अंकित कर दी गई।





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