72.45 फीसदी रहा मतदान: पिछली बार की बजाए इस बार करीब एक फीसदी कम रहा
झुंझुनूं. लोकतंत्र के उत्सव में हुए चुनावों में इस बार सबसे ज्यादा उदयपुरवाटी व खेतड़ी में तो सबसे कम पिलानी विधानसभा क्षेत्र में मतदान हुआ। खेतड़ी व उदयपुरवाटी दोनों ही जगह मतदान बढऩे का कारण त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है। शेष सभी पांचों जगह वर्ष 2013 के चुनाव की तुलना में मतदान प्रतिशत कम हुआ है।
जिले की सातों विधानसभा सीटों का औसत मतदान 72.45 फीसदी रहा, जो पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में 0.9 यानि करीब एक फीसदी के लगभग कम है। जबकि 2013 के विधानसभा चुनावों में 73.34 फीसदी औसत मतदान रहा था। सबसे ज्यादा वोट डालने में उदयपुरवाटी के मतदाताओं ने रूचि दिखाई हैं। यहां सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक 76.21 फीसदी ने वोट डाले जो पिछले चुनावों की तुलना में डेढ़ तथा खेतड़ी में 0.12 फीसदी ज्यादा वोट पड़े। इसके अलावा पिलानी में इस बार पौने दो, झुंझुनूं में 0.78, मडावा में 0.99, नवलगढ़ में 1.75, सूरजगढ़ में 2.63 फीसदी कम वोट पड़े हैं।पिलानी में 69.69, मंडावा में 72.92, नवलगढ़ में 71.41, सूरजगढ़ में 72.82 फीसदी वोट डाले गए। वोटिंग के औसत प्रतिशत में मामूली बदलाव हो सकता है।
92 प्रत्याशियों का फैसला अब 11 को
अंचल की सातों विधानसभा सीटों पर 92 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। शुक्रवार को वोटिंग के बाद इनका भाग्य इवीएम में बंद हो गया । अब यह मतगणना के दिन 11 दिसंबर को खुलेगा।
कुतुबपुरा-धत्तरवाला बूथ पर 1957 मतदाता, एक भी नहीं आया वोट डालने
चिड़ावा(झुंझुनूं). धत्तरवाला पंचायत के कुतुबपुरा गांव में मुर्गी फार्म के विरोध में शुक्रवार को ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया। पंचायत के दोनों बूथों पर कुल 1957 वोट हैं, जिसमें से एक भी वोट पोल नहीं हुआ। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को मतदान के लिए समझाने का खूब प्रयास किया। मगर ग्रामीण जिद पर अड़े रहे। इससे पहले सुबह से ही पोलिंग पार्टियां मतदाताओं का इंतजार करने लगी। मगर शाम तक एक ही मतदाता नहीं पहुंचा। ऐसे में आखिरकार तय समय बाद पोलिंग पार्टिंयों ने मशीन समेटनी पड़ी। उधर, ग्रामीणों ने मुर्गी फार्म के विरोध में 30 वें दिन भी धरना जारी रहा। धरने की अध्यक्षता सवाईसिंह चारण ने की। धरने को किसान सभा के तहसील अध्यक्ष बजरंगलाल बराला, पूर्व सरपंच शीशराम धत्तरवाल, मास्टर सुरजाराम धत्तरवाल, महेश धत्तरवाल, रतनसिंह चारण, दयाराम बुडानिया, कविंद्र बडगुजर, हीरालाल श्योराण व दयाचंद धत्तरवाल ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन के डूलमुल रवैये के कारण ही ग्रामीणों को मतदान का बहिष्कार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रशासन ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो दस पंचायतों की बड़ी सभा कर आगामी रणनीति तय की जाएगी। उधर, ग्रामीणों के मतदान बहिष्कार की सूचना पर तहसीलदार हरसोलिया व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि मुर्गी फार्म बंद होने के बाद ही आंदोलन को वापस लिया जाएगा। धरने में बदनगढ़, गोवली, खुडिया, खुडानिया, बुडानिया, आलमपुरा, जवाहरपुरा, गोविंदपुरा, जाखड़ा, घुमनसर आदि गांवों के लोग शामिल हुए। गौरतलब है कि कुतुबपुरा गांव में हरियाणा की एक फर्म द्वारा मुर्गी फार्म संचालित किया जा रहा है। जिसके विरोध में ग्रामीण लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
इनका कहना है...
सातों विधानसभा सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है। जिले का औसत 72.45 फीसदी रहा है। सभी पार्टियों के लौट जाने के बाद मामूली बदलाव हो सकता है।
दिनेशकुमार यादव, जिला निर्वाचन अधिकारी व कलक्टर (झुंझुनूं)





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