गंगापुरसिटी . सरकार अन्नदाता को पुराने दिनों में होने वाली खेती की सीख देकर ‘अच्छे दिन’ लाने की कवायद में जुटी नजर आ रही है। वर्ष २०२२ तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। रासायनिक खादों से खोखली हुई जमीन की गुणवत्ता बढ़ाने और लोगों को रोगों से बचाने के लिए सरकार किसानों को ‘जैविक खेती’ की ओर लौटा रही है। जैविक खेती की उपज से किसानों को फसल का मूल्य ज्यादा मिलेगा।
सरकार की ओर से किसानों को खुशहाल बनाने के लिए ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (पीकेवाई) शुरू की है। विभाग का कहना है कि रासायनिक खादों से हो रही फसल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं बाजार में इस फसल का मूल्य भी किसान को पर्याप्त नहीं मिल रहा है। किसानों को रासायनिक खादों को छोडक़र परंपरागत जैविक खेती की ओर लौटाने का जिम्मा अब कृषि विभाग पर है। इसके लिए किसान को अनुदान भी दिया जाएगा। कृषि अधिकारी एवं प्रभारी पीकेवाई योजना गोपाल शर्मा ने बताया कि लोग बीमारियों से बच सकें और किसान की आय में इजाफा हो सके। इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग स्तर पर इसका काम शुरू कर दिया गया है। यह खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
कलस्टर बनाने का काम शुरू
कृषि विभाग ने गंगापुरसिटी और बामनवास में कलस्टर बनाने का काम शुरू कर दिया है। शुरुआत में एक किसान को दो हैक्टेयर में जैविक खेती शुरू करने को प्रेरित किया जा रहा है। इसमें किसान को रासायनिक खादों से होने वाले नुकसान जैसे वातावरण प्रदूषण एवं बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जा रही है। वर्तमान की बात करें तो रासायनिक खादों से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता खत्म हो रही है। मिट्टी में जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियन, कॉपर एवं सल्फर आदि की कमी हो रही है, जो स्वास्थ्य से खिलवाड़ जैसा है।
तो दोगुनी हो सकेगी आय
कृषि विभाग का मानना है कि किसान अधिक उत्पादन के लालच में अंधाधुंध रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। किसान जैविक खेती को घाटे का सौदा मान रहा है। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पहले साल में उत्पादन में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन दूसरे वर्ष में पर्याप्त कम्पोस्ट और जैविक खाद डालने से इसकी भरपाई हो जाएगी और उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लोग जैविक खेती से होने वाली फसल को बाजार में महंगे दामों में सहज ही खरीद लेंगे। इससे किसान की आय दोगुनी हो सकेगी।
यह मिलेगी सहायता
- कलस्टर के प्रत्येक क्षेत्र (०.४-२.०० हैक्टेयर) का बफर जोन निर्माण होना है। इसके लिए कृषक को १५०० रुपए प्रति हैक्टेयर प्रति वर्ष सहायता मिलेगी।
- जैविक बीज, जैविक नर्सरी, खेत तैयारी, मजदूरी व्यय तथा जैविक बीज तैयारी के लिए प्रति हैक्टेयर १५०० रुपए मिलेंगे।
- कलस्टर में चयनित प्रत्येक किसान द्वारा 7 फीट लंबी, 3 फीट चौड़ी, १.५ से २.० फीट ऊंची वर्मी कम्पोस्ट इकाई का निर्माण किया जाना है। इकाई बनाने, केंचुआ, मजदूरी आदि के लिए ५ हजार की सहायता मिलेगी।
- पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत आदि इकाई स्थापित करने एवं उसके उपयोग के लिए उपकरण ग्लास, प्लास्टिक बोतल, ड्रम आदि सामग्री के लिए 1 हजार रुपए देय होंगे।
- फॉस्फेट रिच जैविक खाद के प्रति हैक्टेयर दो बैग (100 किलो) के लिए प्रति हैक्टेयर 1 हजार रुपए मिलेंगे।
- ट्राइकोडर्मा, मेटाराइजम आदि, नीम उत्पाद केक/नीम तेल आदि के प्रयोग पर 1 हजार हैक्टेयर रुपए।
- खेत में नत्रजन की मात्रा में वृद्धि करने के लिए कलस्टर के कृषकों को ढेंचा, सनई, ग्लाइरीसिडिया आदि के हरी खाद में उपयोग के लिए 1 हजार रुपए की सहायता मिलेगी।





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