भाजपा से नाराज रहे उसके कोर वोटर्स
प्रतापगढ़ विधानसभा क्षेत्र का बूथवार विश्लेषण
प्रतापगढ़. प्रतापगढ़ विधानसभा में 25 साल बाद फिर कांग्रेस ने अपना परचम लहराया है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाली इस सीट से इस बार कांग्रेस ने भाजपा के परम्परागत शहरी वोटर्स में भी सेंधमारी की है।
यही कारण रहा कि जिन इलाकों में हर बार भाजपा को अधिक वोट मिलते थे, वहां भी इस बार कांग्रेस ने बढ़त बनाए रखी। कांग्रेस का सबसे ज्यादा साथ दिया दलोट क्षेत्र के मतदाताओं ने। यहां हमेशा से भाजपा को अधिक वोट मिलते रहे है, लेकिन इस बार वहां के इलाकों में भाजपा के प्रति नाराजगी अधिक रही। कांग्रेस को अधिक वोट मिले है।
चुनाव परिणाम आने के बाद मतों के बूथवार विश्लेषण से यह बात सामने आईहै। प्रतापगढ़ में कांग्रेस के रामलाल मीणा ने भाजपा के हेमंत मीणा को 16680 वोटों से हराया है। परिणामों के बूथवार विश्लेषण से पता चला कि प्रतापगढ़ शहर के कई इलाके जो भाजपा का गढ़ माने जाते थे। वहां भी इस बार कांग्रेस को बढ़त मिली है।
कई मुद्दों को लेकर भाजपा को करना पड़ा हार का सामना
प्रतापगढ़ विधानसभा चुनाव में 25 साल बाद भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के अनुसार भाजपा को इस बार कई स्थानीय मुद्दे व अपनी ही पार्टी में नाराजगी के चलते हार का सामना करना पड़ा है। दलोट क्षेत्र में दलोट को मंडल बनाने की मांग को लेकर भाजपा कार्यकर्ता नाराज थे। वहीं प्रतापगढ़ से दलोट रोड़ खराब होने के कारण सहित कई मुद्दों को लेकर हार देखनी पड़ी है।
दोनों प्रत्याशियों ने अपने- अपने घर से लिए ज्यादा वोट
विधानसभा चुनाव में दोनो ही पार्टियों के प्रत्याशियों ने अपने घरों से अपने पक्ष में वोट लिए है। भाजपा के हेमंत मीणा को अपने घर गोपालपुरा मेें 611 मत मिले। वहीं कांग्रेस के रामलाल को 145 मत ही मिले है। दूसरी ओर कांग्रेस के रामलाल मीणा को करमदीखेड़ा से 310 मत मिले, वहीं भाजपा के हेमंत को मात्र 31 मत ही मिले।
दलोट क्षेत्र मेें कांग्रेस को 3 हजार 180 वोट मिले ज्यादा
भाजपा का गढ़ माने जाने वाले प्रतापगढ़ शहर व दलोट क्षेत्र में भी कांग्रेस ने इस बार सेंधमारी कर वोट लिए है। दलोट क्षेत्र में भाजपा को अपने मुंह की खानी पड़ी। इस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी हेमंत को 14 हजार 17 वोट मिले है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 17 हजार 197 वोट मिले है। इसमें भाजपा प्रत्याशी को 3 हजार 180 वोट कम मिले है। दलोट कस्बे से भी भाजपा को 607 वोट कम मिले है।
शहर मेें भाजपा को 419 वोट कम मिले
विधानसभा चुनाव में हर बार भाजपा को शहर से अधिक वोट मिलते रहे है। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में शहर में कांग्रेस से भाजपा को 419 वोट कम मिले है। शहर से कांग्रेस के रामलाल को 10 हजार 945 वोट मिले है। वहीं भाजपा को 10 हजार 526 वोट ही मिले है।
भाजपा का कार्यालय बंद, कांग्रेस में पसरा सन्नाटा
विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों ही पार्टियों ने अपने कार्यालय खोले थे। लेकिन चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद ही हार का सामना करने के बाद भाजपा कार्यालय बंद हो गया। वहीं कांग्रेस कार्यालय पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
प्रतापगढ़ में नोटा ने दिखाई ताकत, तीसरे नम्बर पर रहा
प्रतापगढ़. जिले की प्रतापगढ़ और धरियावद विधानसभा क्षेत्र में मंगलवार को हुईमतगणना में नोटा ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखा दी। दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में नोटा भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरे नम्बर पर रहा। यहां तक कि बसपा भी नोटा से पीछे रहा। इस बार नोटा को धरियावद में 5769 और प्रतापगढ़ में 2665 मत मिले हैं। धरियावद में भाजपा(96457) और कांग्रेस (72615) के बाद तीसरे नम्बर में रहा। यहां सीपीआई को 5280, बीएसपी को 4465, बीटीपी को 4406 , सीपीआई एमएल(एल) को 2124, बीवाईएस को 2117 और जेएसआर को 1044 वोट मिले। इसी प्रकार प्रतापगढ़ विधानसभा क्षेत्र में नोटा को 2665 वोट मिले, जो कि कांग्रेस(100625), भाजपा (83945) के बाद अन्य दलों और निर्दलीयों की तुलना में ज्यादा थे। यहां नोटा के बाद बसपा को 2378, बीवाईएस को 1943, निर्दलीय नारायण लाल को 1864 और निर्दलीय जगदीश चन्द्र को 1259 वोट मिले।
गौरतलब है कि इस बार सोशल मीडिया में नोटा को वोट देने को लेकर काफी अभियान चला था। एससीएसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ मुखर हुए कुछ लोग नोटा के समर्थन में अभियान चला रहे थे।





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