देश के पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सेमी फाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। एक्जिट पोल के मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस की जीत तय है, क्योंकि वसुंधरा सरकार के कई मंत्रियों पर हार का खतरा मंडरा रहा है।
अब सभी की नजरें 11 दिसम्बर को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस की वापसी तय है। इस बार कई सीटों के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं, क्योंकि किसान, सवर्ण और दलित वर्ग भाजपा से नाराज था। जिससे भाजपा को एंटी कम्बेसी का डर सता रहा है। वहीं,भाजपा के कई मंत्रियों पर भी हार का खतरा मंडरा जा रहा है। उनमें यूनुस खान, प्रभुलाल सैनी, बाबुलाल वर्मा, अनिता भदेल, अजय सिंह किलक, गजेंद्र सिंह खींवसर, श्रीचंद कृपलानी, ओटा राम देवासी, अरूण चतुर्वेदी और कालीचरण सर्राफ हैं, जो कड़े संघर्ष में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। माना जा रहा यदि इन नेताओं की हार हुई तो भाजपा राजस्थान में बड़े अंतर से चुनाव हारेगी। यही नहीं, और भी कई वजह सामने आ रही हैं। एक वजह यह भी है कि इस बार का वोटर मौन है, जिसने भाजपा की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा रखी है। हालांकि फैसला क्या होना है, यह तो 11 दिसंबर को तय हो ही जाएगा।
एक्जिट पोल में बन रही कांग्रेस की सरकार लेकिन..
कोटा. राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए कई एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वे में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती दिखाई गई है। चुनाव नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे लेकिन एक्जिट पोल के अनुमानों के बाद कांग्रेस नेताओं में खुशी का महौल है। हाड़ौती के लिए किए गए सर्वे में भी कांग्रेस को बढ़त दिखाई गई है लेकिन अनुमानों के मुताबिक कोटा जिले की सांगोद सीट पर भाजपा के हीरालाल नागर कांग्रेस के भरत सिंह को हरा सकते हैै। भरत सिंह 3 बार के विधायक और पूर्व मंत्री रहे हैं।
भाजपा को बड़ा नुकसान राजस्थान में झेलना पड़ रहा है। हालांकि राजे के गृह जिले झालावाड़ से उनके लिए अच्छी खबर है। एक्जिट पोल के सर्वे के औसत के मुताबिक जिले की 4 में से 3 सीट भाजपा जीत सकती है।





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