सत्ता से दूर होते ही याद आते हैं कार्यकर्ता
सीकर. विधानसभा चुनावों में हुई करारी हार के बाद भाजपा की समीक्षा बैठक रविवार को राणी शक्ति रोड स्थित कार्यालय में हुई। इसमें जिले की आठों सीटों की हार को लेकर कार्यकर्ताओं ने कारण भी गिनाए। कार्यकर्ताओं ने प्रदेश प्रवक्ता व आमेर विधायक सतीश पूनियां की मौजूदगी में कहा कि हार के बाद ही पार्टी को कार्यकर्ताओं की याद आती है। सत्ता के समय में तो कार्यकर्ता छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान होता रहा। बैठक में नीमकाथाना के पूर्व विधायक प्रेमसिंह बाजौर व खंडेला के पूर्व विधायक बंशीधर बाजिया नहीं आए। इस दौरान जिलाध्यक्ष विष्णु चेतानी, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिराम रणवां, मनोज सिंघानियां, जिला प्रमुख अपर्णा रोलण, पूर्व विधायक झाबर सिंह खर्रा, रतन जलधारी, गोरधन वर्मा, हरीश कुमावत, सुनीता जाखड़, डॉ. कमल सिखवाल, प्रकाश दाधिच आदि मौजूद रहे।
योगी की सभा को भी बताया घाटे का सौदा
बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि लक्ष्मणगढ़ व फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए हुई यूपी के सीएम योगी की सभा घाटे का सौदा रही। फतेहपुर में फर्जी मतदान के कारण पार्टी मामूली अंतर से हार गई। वहीं मुस्लिम मतदाताओं के एकजुट होने से पार्टी को लक्ष्मणगढ़़ व फतेहपुर क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा।
सीकर में वाहिद फैक्टर
सीकर विधानसभा की समीक्षा बैठक में सामने आया कि वाहिद चौहान ने इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले कम वोट लिए। इस बार बदले हुए समीकरणों के कारण भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। वहीं पार्टी को गुटबाजी व भितरघात के कारण भी यहां नुकसान हुआ।
दांतारामगढ़ में मन से नहीं जुटे कार्यकर्ता
दांतारामगढ़ चुनाव में हार के पीछे बड़ी वजह टिकट वितरण के बाद बनी गुटबाजी रही। आखिरी समय तक कुछ पदाधिकारी व टिकट के दावेदार पूरी तरह से चुनाव मैदान में नहीं आए। इस कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
ब्राह्मणों की आपसी रार का असर
सीकर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी रतन जलधारी को ब्राह्माणों की आपसी गुटबाजी का भी नुकसान उठाना पड़ा। भाजपा का टिकट देने को लेकर शुरू हुई पार्टी की रार चुनाव परिणाम में भाजपा को संपूर्ण जिले में प्रभावित कर गई। जलधारी को टिकट देने में भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने रतनगढ़ से राजकुमार रिणवा की टिकट काटना भी ब्राह्माणों की अंदरखाने की सियासत का अहम हिस्सा रहा। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष महेश शर्मा की नाराजगी और त्यागपत्र के बाद ब्राह्मण समुदाय गौड एवं खंडेलवाल में बंट गया। इसका फायदा कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र पारीक को काफी हद तक मिला। गौरतलब है कि सीकर में गौड़ ब्राह्मण समाज एवं खंडेलवाल ब्राह्मण समाज के बीच चुनावी कड़वाहट 2008 के विधानसभा चुनाव में खंडेलवाल ब्राह्मण समाज से आने वाली पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा की विधानसभा टिकट काटकर गौड़ ब्राह्मण समाज से आने वाले महेश शर्मा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाने से हुई थी। महेश शर्मा की चुनावी हार के बाद शर्मा समर्थकों ने राजकुमारी शर्मा एवं खंडेलवाल ब्राह्मण समाज पर चुनाव हराने का आरोप जड़ा था। इस चुनाव से प्रारंभ हुई गौड़ एवं खंडेलवाल ब्राह्मणों की यह रस्साकस्सी भारी पड़ गई। गौड़ ब्राह्मण समाज की सीकर में बहुलता के बाद भी समाज के टिकट मांगने वालों को भाजपा प्रत्याशी नहीं बनाकर खंडेलवाल ब्राह्मण समाज से आने वाले जलधारी को टिकट मिलने से नाराजगी हुई।





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