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आतंकियों से लोहा लेते हुए शेखावाटी का लाल शहीद, ऑपरेशन शुरू करने से पहले घर भेजी थी यह फोटो

रतनगढ़। तहसील के गांव भींचरी निवासी किशनसिंह राजपूत शनिवार सुबह आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। किशनसिंह जम्मू कश्मीर के पुलवामा में तैनात थे। आतंकवादियों के घुसने की सूचना पर उनकी बटालियन ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के सिरून गांव में सुबह चार बजे मोर्चा संभाल लिया। सुबह सात बजे सेना के जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान किशनसिंह ने सबसे खूंखार आतंकवादी जहूर ठाकोर को गोलियों से छलनी कर मौत की घाट उतार दिया। इसी बीच एक अन्य आतंकवादी की गोली किशनसिंह के सीने को छलनी करते हुए पार हो गई और वे शहीद हो गए।

किशनसिंह राजपूत 2009 में सेना में 55 आरआर में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उसके दो पुत्र हैं। जिसमें बड़ा पुत्र धर्मवीर (4) और मोहित (02) साल का है। शहीद के एक बड़ा भाई जीवराजसिंह है। वह कोलकाता में ट्रक चलाकर परिवार का लालन-पालन करते हैं। शहीद किशनसिंह की पत्नी रतनगढ़ में खाडिया बास में एक किराए के मकान में बच्चों के साथ रहती है।


खूंखार आतंकवादी जहूर ठाकोर को किया ढेर
सेना में किशनसिंह राजपूत के साथ मोर्चा संभालने वाले जवान विनोदसिंह ने बताया कि जहूर ठाकोर सेना से भगोड़ा है। वह वर्षों पहले भाग चुका था। सेना को भी इसकी तलाश थी। भगोड़ा ठाकोर खूंखार आतंकवादी बन गया था। इसे सेना की सारी बारीकियों की जानकारी थी। जिसके चलते कई बार ऑपरेशन में परेशानी आई। किशनसिंह ने सूझबूझ से काम करते हुए तीन आतंकवादियों में से सबसे पहले ठाकोर को अपना निशाना बनाया और उसका सीना गोलियों से छलनी कर ढेर कर दिया। इसके बाद सेना के जवानों ने अन्य दो आतंकवादियों को ढेर ऑपरेशन करीब साढ़े सात बजे समाप्त कर दिया।


ऑपरेशन शुरू करने से पहले भांजे को भेजी फोटो
भींचरी गांव निवासी जवान किशनसिंह जब जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के सिरून गांव में मोर्चा संभाले हुए थे। उससे पहले सेना के साथियों ने किशनसिंह की मौके पर तैनातगी के फोटो खींचे। इसके बाद उसने भींचरी में रह रहे उसके भांजे वीरेन्द्र को फोटो भेजे और बताया कि वे इस तरह जंगल में आतंकवादियों को अपना निशाना बनाते हैं।



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