सीकर. राजस्थान के सियासी रण में अनूठी मिसाल भी देखी गई। अभावों को मात देकर प्रदेश के 85713 दिव्यांग भी हौसलों के दम पर बूथ तक पहुंचे। रोचक बात यह है कि इनमें से 1661 ने प्रत्याशियों की सूरत ही नहीं देखी जबकि 6745 मूक-बधिरों ने प्रत्याशियों के दावे-वादों को नहीं सुना। लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट डाले। इस बार 1300 से अधिक हल्के मानसिक विमंदितों ने भी वोटिंग की।
दिव्यांगों का कहना है कि हमने प्रत्याशी देखा और सुना नहीं लेकिन अपने सहयोगियों के जरिए पूरे सियासी माहौल पर नजर रखी। आखिर में जो सबसे अच्छा लगा उसके वोट देकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस बार निर्वाचन विभाग ने भी दिव्यांगों को घर से बूथ तक आने-जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की। इस कारण दिव्यांगों ने लोकतंत्र के महोत्सव में हौसलों की उड़ान भरी है।
इस उम्मीद में मतदान, मिले विशेष शिक्षक
दिव्यांगों का कहना है कि प्रदेश में दिव्यांगों की राह में कई बड़े रोड़े है। इसके लिए पहली आवश्यकता हर स्कूल में विशेष शिक्षक की है। उनका कहना है कि दिव्यांगों को यदि बेहतर शिक्षा मिले तो वह किसी से कम नहीं है। वहीं दिव्यांगों की पेंशन, उपकरण सहित अन्य समस्याएं भी है।
कहां कितने नेत्रहीन ने डाला वोट
टोंक 10
अजमेर 109
नागौर 102
पाली 44
जोधपुर 92
जैसलमेर 25
बाड़मेर 105
जालौर 24
सिरोही 66
उदयपुर 38
डूंगरपुर 0
बांसवाड़ा 40
चित्तौडगढ़़ 78
राजसमंद 29
बूंदी 43
कोटा 166
बारां 17
झालावाड़ 18
प्रतापगढ़ 80
गंगानगर 14
हनुमानगढ़ 36
बीकानेर 46
झुंझुनूं 34
सीकर 29
जयपुर 54
अलवर 64
भरतपुर 102
धौलपुर 18
करौली 17
दौसा 09
सवाईमाधोपुर 64





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