बाड़मेर. पंद्रहवीं लोकसभा में बाड़मेर के नाम एक रिकार्ड बना है। बाड़मेर ने राजस्व मंत्रालय की हैट्रिक लगाई है। लगातार तीसरी सरकार में बाड़मेर जिले के विधायक को मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है।
बायतु विधायक हरीश चौधरी को राजस्व मंत्री बनाया गया है। इससे पूर्व 2013 से 2018 तक भाजपा सरकार में पचपदरा से विधायक रहे अमराराम चौधरी को राजस्व राज्यमंत्री रहे, यह उनका स्वतंत्र प्रभार था।
2008 से 2013 तक अशोक गहलोत सरकार में गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी को राजस्व मंत्री बनाया गया।
पूर्व में गंगाराम चौधरी रहे- 1967 में बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी से जीते हेमाराम चौधरी राजस्व उपमंत्री रहे थे। हेमाराम को दुबारा 1998 की सरकार में राजस्व मंत्री बनाया गया था।
बाड़मेर को मिला यह फायदा
2008 में बाड़मेर जिले में 1969 राजस्व गांव थे जो 2018 में 2775 हो गए है। हेमाराम चौधरी ने 600 के करीब राजस्व गांव अपने कार्यकाल में बनाए और शेष अमराराम चौधरी ने बनाए जो जिले में सर्वाधिक रहे है। अब जिले में 15 तहसील और 11 उपखण्ड हो गए है जबकि 2008 में 07 उपखण्ड और 09 तहसील ही थी।
नहीं बना पाए बालोतरा जिला
जिले की सबसे बड़ी मांग बालोतरा को जिला बनाने की है। 1980 से लगातार चल रही इस मांग 2008 व 2013 में यह चुनावी मुद्दा रहा। दोनों बार दावे किए गए लेकिन नतीजा सिफर रहा। इस बार फिर बालोतरा जिला सबसे बड़ी मांग है।
नए राजस्व मंत्री के अपने जिले में चैलेंज
- सभी तहसीलों के राजस्व दस्तावेज ऑन लाइन करने का कार्य अधूरा है। केवल सिवाना तहसील ही ऑन लाइन हुई है। बाड़मेर पायलट प्रोजेक्ट में शामिल था।
- जिले में स्वीकृत 445 पटवारियों के पदों में से 165 पद रिक्त है, भू अभिलेख निरीक्षक भी 144 में से 42 रिक्त है
- ओरण-गोचर की जमीन पर अतिक्रमण की भरमार है। इनके सीमाज्ञान एवं सुरक्षा के प्रबंध
- पटवार प्रशिक्षण केन्द्र बाड़मेर में अस्थाई है जिसे स्थाई करने की दरकार
- धनाऊ नई तहसील बनी लेकिन शुरू नहीं हो पाई
- कल्याणपुर व पाटोदी नई तहसील बनाने की जरूरत
- चवा व बिशाला को उपतहसील बनाने की दरकार
- जब तक बालोतरा जिला नहीं बनता यहां अतिरिक्त जिला कलक्टर का पद सृजित किया जाए





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