प्रतापगढ़.
एक और सरकार पशुपालन को बढ़ावा दिए जाने की बात कही रही है वहीं दूसरी और इसके लिए पर्याप्त साधन और स्टाफ ही नहीं दिया जा रहा। आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले में प्रचुर पशुधन होने के बावजूद यहां पशुओं का सबसे बड़ा अस्पताल बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय ही कई कमियों से जूझ रहा है। जिसका खामियाजा कहीं ना कहीं पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है।
6 में से 2 चिकित्सक
बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में चिकित्सकों के कुल 6 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से महज 2 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। वहीं पशु चिकित्सा सहायक, पशुधन सहायक, वरिष्ठ लिपिक, पशुधन परिचर आदि के भी कई पद रिक्त चल रहे हैं।
ना ओटी, ना इंडोर वार्ड
प्रदेश के कमोबेश सभी बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालयों में पशुओं के उपचार और ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थियेटर की सुविधा मौजूद है लेकिन जिले के सबसे बड़े इस अस्पताल में अब तक ऑपरेशन थियेटर की सुविधा मौजूद नहीं है। वहीं गंभीर घायल पशुओं को भर्ती करने के लिए इंडोर वार्ड की सुविधा भी नहीं है तो कई बार मांग के बावजूद आज तक पशुओं के पेट में बीमारी पता लगाने वाली सोनाग्राफी मशीन तक मुहैया नहीं कराई गई है। ऐसे में चिकित्सकों को अपर्याप्त संसाधनों से ही पशुओं का उपचार करना पड़ रहा है।
कौन करे एक्सरे
संसाधनों के नाम पर चिकित्सालय में पशुओं के एक्सरे के लिए 5 लाख की लागत से एक्स रे मशीन लगाई गई थी लेकिन एक्सरे करने के लिए एक्सरे मेन की नियुक्ति ही नहीं की गई। ऐसे में चिकित्सकों को ही पशुओं के उपचार के साथ ही एक्सरे आदि का कार्य भी करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की भी कमी के कारण यह उनके लिए दुष्कर हो चला है।
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परेशानी तो आती है...
अस्पताल में संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते परेशानी तो आती ही है। इस सम्बंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है। मौजूदा स्टाफ और संसाधनों से हरसंभव बेहतर कार्य का प्रयास करते हैं।
डॉ जयप्रकाश परतानी, पशु चिकित्सा अधिकारी, बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय, प्रतापगढ़





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