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हर सरकार से वादे मिले पर स्थायी नियुक्ति नहीं

- शैलेंद्र अग्रवाल


जयपुर।

सालों से चुनावी मुद्दा बनते आ रहे संविदाकर्मी और आंगनबाड़ी कर्मचारियों के अगले पांच साल में अच्छे दिन आएंगे या इंतजार में ही कट जाएंगे। इन 1 लाख 30 हजार से अधिक कर्मचारियों पर सीधे तौर पर जनता के कल्याण की जिम्मेदारी है, लेकिन पिछली सरकार घोषणा पत्र में वादा करने के बावजूद इनका कल्याण नहीं कर पाई और नई सरकार ने घोषणा पत्र में घुमा फिराकर उसी वादे को दोहराया है।

प्रदेश में पिछली सरकार वादा पूरा नहीं कर पाने पर कार्यकाल के शुरूआत में ही युवाओं की नाराजगी झेल चुकी हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को इन युवा कर्मचारियों का विरोध झेलना पड़ा। प्रदेश में लिपिक से लेकर शिक्षक तक विभिन्न पदों पर लगे इन कर्मचारियों की भागदौड़ जैसे—तैसे नौकरी पाने से शुरू होती है, इससे एक बार बेरोजगारी से निजात मिल जाती है और फिर संविदा का कार्यकाल बढ़ता रहता है।

सरकारी नौकरी के लिए आयुसीमा तय है, लेकिन समय पर भर्तियां नहीं निकलने से यह भी निकल जाती है। उधर, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कई बार संविदा पर नियुक्तियों पर एतराज जता चुके, लेकिन नियमित पदों पर ऐसे कर्मियों की भर्ती का सिलसिला जारी है।

क्या हो सकता है रास्ता
भविष्य में संविदा पर भर्ती के बजाय नियमित नियुक्ति के प्रयास हो
मौजूदा संविदाकर्मियों को बोनस अंक और आयु सीमा में छूट दी जा सकती है
संविदाकर्मियों के नियमन में समस्या
बोनस अंक देकर भर्ती करने पर नए बेरोजगारों को एतराज
संविदा पर सेवा देते—देते उम्रपार होने की सीमा पर पहुंचे
हाईकोर्ट कह चुका कि उमा देवी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संविदा पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।

- बोनस अंक देकर संविदाकर्मियों को नियमित नियुक्ति देने के प्रयास किए थे, लेकिन विभिन्न कोर्ट के आदेशों के कारण इसमें सफल नहीं हो पाए। वर्तमान सरकार भी संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा पूरा नहीं कर पाएगी।
राजेन्द्र राठौड़, भाजपा सरकार के शासन में मंत्री रहे

कांग्रेस का चुनावी वादा
संविदाकर्मियों, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन व राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों, पैराटीचर्स, उर्दू पैराटीचर्स, लोक जुम्बिश कर्मियों, आंगनबाड़ी कर्मियों, शिक्षाकर्मियों, विद्यार्थी मित्रों, पंचायत सहायकों सहित अन्य विभागों के गैर नियमित कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान।
युवाओं के अधिकाधिक रोजगार, प्रदेश के सभी राजकीय विभागों में रिक्त पड़े स्वीकृत पदों को समयबद्ध रूप से भरा जाएगा और रोजगार दिया जाएगा।
युवा बेरोजगारों को अधिकाधिक सरकारी, अर्धसरकारी तथा प्राइवेट क्षेत्र में नौकरियों एवं स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराना।

कोर्ट ने खोला रास्ता
भाजपा सरकार के समय प्रदेश में बोनस अंक के जरिए नियुक्ति को पहले हाईकोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी नहीं मिल पा रही थी। बाद में सरकार को अनुभव के आधार पर 5,10,15 बोनस अंक देने की छूट मिल गई। अब सरकार के पास संविदाकर्मियों को बोनस अंक देकर नियुक्ति देने का रास्ता खुला है।

आप ने लिया सबक: दिल्ली में संविदाकर्मियों की नाराजगी झेल चुकी आप पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में पीपीपी, ठेकाप्रथा व निजीकरण खत्म करने का वादा किया था।

- नई सरकार से उम्मीद है। पंचायती राज कर्मियों के 19 हजार से अधिक पदों को भरने के लिए 2013 में शुरू की गई प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। एनआरएचएम कर्मियों के पद भरने के लिए शुरू की गई प्रक्रिया के तहत सभी 18 हजार पद भरे जाएं।
मघसिंह राजपुरोहित, प्रदेशाध्यक्ष, पंचायतीराज संविदा कर्मचारी संघ

भाजपा ने दोहराया पुराना वादा
2018: संविदाकर्मियों को नियमित भर्तियों में अनुभव के लिए 5 से 15 तक बोनस अंक दिए जा रहे हैं। विद्यार्थी मित्र, संविदा शिक्षक, शिक्षामित्र, अंशकालिक शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए उच्चाधिकार समिति का गठन किया जाएगा। इन कर्मियों को मेडिक्लेम व इएसआइ का लाभ दिया जाएगा।

2013: जनता जल योजना कर्मी, प्रेरक, विद्यार्थी मित्र, वनमित्र, कृषि मित्र, पैराटीचर, मदरसा पैराटीचर, शिक्षाकर्मी, लोक जुम्बिश कर्मचारी, एनआरएचएम कर्मचारी, नरेगाकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, साथिन, आशा सहयोगिनी, कम्प्यूटर ऑपरेटर शिक्षक, सीसीडीयू आदि को नियमित करने को नीति बनेगी।

अन्य राज्यों के हाल
भत्ते से सम्बन्धित मामला राजस्थान सरकार के लिए ही चुनौती नहीं है। दूसरे कई राज्यों में भी इन कर्मियों को नियमित करने की मांग है। दिल्ली और बिहार सरकारों ने निर्णय भी किए हैं, उत्तरप्रदेश में संविदाकर्मियों को नियमित नहीं करने का निर्णय कर लिया है।

बिहार
5 लाख संविदाकर्मी
नियमित करने की पहल
60 साल की आयु तक संविदा पर कर्मचारी रह सकेगा
बेसिक वेतन के साथ मेडिकल, टीए—डीए सुविधा भी
मातृत्व व पितृत्व अवकाश मिलेगा

दिल्ली
संविदाकर्मी व आउटसोर्सिंग के जरिए कार्यरत कर्मी नहीं हटेंगे
दिल्ली सरकार का वेतन 9 हजार रुपए बढ़ाने का निर्णय
वेतन बढ़ोतरी रोकने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार
संविदाकर्मियों की वेतन बढ़ोतरी जारी रखने का किया निर्णय

उत्तरप्रदेश
सरकार ने संविदाकर्मियों को किया बर्खास्त
हटाए गए संविदाकर्मियों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने कहा, कर्मचारी सरकारी आदेश के खिलाफ नहीं कर सकते याचिका

हिमाचल प्रदेश
475 रु. से 2500 तक वेतन बढ़ाया
सरकार ने एक अप्रेल 18 से लागू की वेतन बढ़ोतरी
मूल वेतन के साथ अब ग्रेड पे का पूरा भुगतान मिलेगा

झारखंड
10 साल से कार्यरत संविदाकर्मी नियमित
अस्थायी कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे
सुप्रीम कोर्ट ने दिया कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश

पंजाब
डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी
नियमित मांग को लेकर आंदोलन
नियमितकर्मियों के समान वेतन व सुविधा की मांग
कर्मचारी कल्याण अधिनियम—2016 का भी मांगा संरक्षण

आंध्रप्रदेश
6 माह मातृत्व अवकाश
अब 58 के बजाय 60 साल तक
साल में 10 माह का वेतन मिलता था, अब 12 माह का मिलेगा



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