आबूरोड. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जहां जिला प्रशासन को शहर के सांतपुर स्थित नाड़ी की भूमि से अतिक्रमणहटवाकर पुन: मूल स्वरूप में लाना पड़ा, वहीं तहसील क्षेत्रकी कई अन्य नाडिय़ां भी है, जो प्रशासन की देखरेख व संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व खो रही है। भूजल स्तर बनाए रखने के उद्देश्य से वर्षों बनाई गई इन नाडिय़ों में कहीं झाडिय़ों का अम्बार व मिट्टी डालकर पाट दिया गया है, तो कहीं अतिक्रमण की जद में हैं।इनकी खस्ताहाल स्थिति से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन नाडिय़ों के संरक्षण व देखरेखके लिएप्रशासन न्यायालय के आदेश का इंतजार कर रहा है। कुछ ऐसा ही हाल मुदरला पंचायत के वीर बावसी मंदिर नाड़ी का है।
मुदरला पंचायत के अधीन तलहटी किंवरली मार्ग से सटकर ही खसरा ६८० में ४ बीघा ३ बिस्वा में गैर मुमकिन नाड़ी के लिएभूमि दर्ज है, लेकिन पंचायत प्रशासन की अनदेखी के चलते नाड़ी अपना अस्तित्व खो रही है। कभी पानी से लबालब रहने वाली ये नाड़ी बारिश में पानी की आवक के बावजूद कुछ ही दिन में खाली हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि नाड़ी की सुध यदि प्रशासन ले तो जल का उचित उपयोग किया जा सकता है और भूजल स्तर भी बढ़ेगा। कई बार पंचायत को अवगत करवाने के बावजूद इसके संरक्षण के लिए कोईप्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
झाडिय़ों का अम्बार, अतिक्रमणकी आशंका
नाड़ी की वर्तमान स्थिति की बात करें मौके पर झाडिय़ों का अम्बार है। कई जगहों पर मिट्टी डालकर तालाब को पाटने का प्रयास भी पूर्व में किया जा चुका है, ऐसे में नाड़ी की भूमि पर अतिक्रमण की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है, इसके बावजूद पंचायत प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इन्होंने बताया ...
हां, नाड़ी तो पंचायत में ही आती है, लेकिन इसके संरक्षण को लेकर कोई प्रस्ताव लेने की जानकारी नहीं है। देखकर ही बता सकता हूं।
- ओमप्रकाश, सचिव, ग्राम पंचायत मुदरला





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