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घर की रसोई से सर्दी से कैसे बचाव करे जानिए

पाली । सर्दी का मौसम सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन, श्वांस के मरीजों व बच्चों के लिए ये मौसम नाजुक भी है। इस मौसम में सर्दी, जुकाम और जोड़ों में दर्द के साथ-साथ सांस की परेशानी का बढऩा आम बात है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है।
सर्दियों का मौसम जहां एक ओर आम आदमी के स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा होता है, वहीं कुछ खास व्याधियों जैसे अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यह मौसम कुछ ज्यादा ही समस्याएं लाता है। चिकित्सकों के अनुसार यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है।
जिला आयुर्वेद अस्पताल पाली के पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश शर्मा के अनुसार तेज सर्दी में शरीर की शिरा धमनियां एवं कोशिकाएं संकुचित हो जाती है। जिससे शरीर का रक्त प्रवाह कम हो जाता है। जठराग्नि संकुचित होकर तीव्र हो जाती है। ठंडा एवं लघु आहार (जल्द बचने वाला) करने से वायु प्रकुपित होकर हृदयघात, श्वास रोग, पक्षपात, उदर आदि रोगों को उत्पन्न कर देती है। सर्दी-जुकाम से बचने के लिए घर की रसोई में भी कई इलाज है। जिनका उपयोग कर हम सर्दी जुकाम से बच सकते है।

सर्दी से बचाव के लिए ये आजमाएं नुस्खे
सर्दी से बचने के लिए गुड़ का सेवन करना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
ठ्ठ अदरक शरीर में रोगों से लडऩे की क्षमता बढ़ाता है। चाय में अदरक का उपयोग करना चाहिए। बच्चों को अदरक पीसकर उसमें शहद मिलाकर देना चाहिए। इससे निमोनिया समेत दूसरी मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं।
ठ्ठ सर्दी में रोजाना नाश्ते के बाद आधा चम्मच अजवाइन का सेवन करना हितकर रहता है।
ठ्ठ सर्दियों में पिसी हल्दी संजीवनी की तरह काम करती है। यह एलर्जी व गले में खराश सहित बीमारियों से बचा सकती है।
ठ्ठ रात को सोने से पहले हल्दी मिला गर्म-गर्म दूध सर्दी-जुकाम में आराम देता है।
ठ्ठ तिल या सरसों के तेल को गर्म करके मालिश करनी चाहिए।
ठ्ठ सर्दी में रात लम्बी होती है। इसलिस सुबह जल्दी नाश्ता कर लेना चाहिए।
ठ्ठ पीने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करना चाहिए।
ठ्ठ गर्म पानी से नहाना चाहिए। पहले पैर व कमर पर पानी डालकर स्नान करना चाहिए।
ठ्ठ अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं शरीर के अनुरूप व्यायाम एवं आसन करने चाहिए।
ठ्ठ भोजन में बाजरा एवं मक्के की रोटी, तिल तेल, लहसून की चटनी, खजूर, बादाम, अंजीर, उड़द, मोठ, दूध व अल्प मात्रा केशर, गुड़ एवं तिल के बने पदार्थों का उपयोग करना चाहिए।
ठ्ठ मसालों में हल्दी, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, दालचीनी, जायफल, जावित्री, लोंग का उपयोग करना चाहिए।
ठ्ठ पंचकर्म का उपयोग
चिकित्सक की सलाह अनुसार करना चाहिए।



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