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जोन छह से दस में पहुंचे जय-वीरू

सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में शुक्रवार को जोन दस पर बाघ के दीदार होने से पर्यटक रोमांचित हो उठे। सुबह की पारी में पार्क भ्रमण पर गए पर्यटकों को जोन दस के मुख्य गेट पर ही बाघिन लाडली(टी-8) के दोनों शावक(जय-वीरू) नजर आए। पर्यटकों ने काफी देर तक शावकों की अठखेलियों को निहारा। इसके बाद दोनों शावक झाडिय़ों में ओझल हो गए। शावकों के साथ उनकी मां नजर नहीं आई।अब तक जोन छह में रहता था विचरण : आमतौर पर बाघिन लाडली का विचरण जोन छह में कुण्डाल, सारन के पठठे, रायपुर की बावड़ी आदि इलाकों में रहता है। वहीं शावक भी मां के साथ ही विचरण करते देखे जाते हैं, लेकिन शुक्रवार सुबह लाडली के शावकों के जोन दस में नजर आने के बाद रणथम्भौर में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।


दो साल के हैं शावक, नई टेरेटरी की तलाश
अब तक लाडली के साथ जोन छह में विचरण करने वाले शावक लाडली के लास्ट लीटर की संताने हैं। इनकी उम्र करीब दो साल बताई जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो दो साल के बाद शावक व्यस्क हो जाते हैं और मां को छोड़कर अपनी नई टेरेटरी की तलाश में जुट जाते हैं। ऐसे में दोनों शावकों के जोन दस में नजर आने को टेरेटरी की तलाश से जोड़कर भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि रणथम्भौर के जोन छह में वर्तमान में कुंभा(टी-34),टी-57, नूर(टी-39) व उसकी एक शावक व टी-58 मेल टाइगर का विचरण हैं। वहीं जोन दस में फतेह( टी-42), बाघिन टी-13 व एक अन्य फीमेल टाइगर का विचरण रहता है।


मॉनिटरिंग के लिए लगाई टीम
शावकों के गेट के पास सड़क पर आने के कारण वन अधिकारियों की ओर से शावकों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके लिए वन विभाग की एक टीम जोन दस पर तैनात की गई है। वन विभाग की टीम लोगों को शावकों से दूर कर रही है।


गाय का किया शिकार
सूत्रों के अनुसार शावकों ने जोन दस के पास सड़क पार सुबह एक गाय का शिकार भी किया है। पर्यटकों ने सुबह शावकों को शिकार का लुत्फ उठाते देखा। वहीं शावकों को शिकार का लुत्फ उठाते देखने के लिए पर्यटक वाहनों का जमावड़ा लग गया। वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि शावकों को देखने के लिए कुछ अवैध पर्यटन वाहन भी जोन के गेट पर पहुंच गए। हालांकि वनाधिकारियों ने उन्हें जोन में प्रवेश नहीं दिया। अब वन विभाग की ओर से ऐसे वाहनों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की कवायद की जा रही है।


कुंभा व टी-99 के भी हुए दीदार
इसके अतिरिक्त जोन दस में ही बाघ कुंभा ( टी-34 ) व बाघिन टी-99 कि भी पर्यटकों के दीदार हुए। दोनों शोलेश्वर मार्ग पर बीच मार्ग पर बैठे नजर आए। पर्यटकों ने काफी देर तक बाघ बाघिन को निहारा।


बाघिन टी-8 के शावकों ने जोन दस के गेट के पास ही गाय का शिकार किया है। शावकों की लगातार मॉनिटरिंग कराई जा रही है। कुछ वाहन बिना टिकट के भी पार्क के गेट तक पहुंच गए थे। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।



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