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चुनावी चौसर पर फिर शह-मात का खेल, प्रदूषण की गलफांस और मतदाता अब भी मौन

कपड़ा नगरी के रूप में विश्व में ख्यात पाली शहर पिछले कुछ सालों से औद्योगिक अशांति, प्रदूषण और बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पाली विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर से चुनावी चौसर जम गई है। पाली मारवाड़ की इस विधानसभा सीट पर चार बार से विधायक ज्ञानचंद पारख पांचवीं बार मैदान में हैं। उनके लगातार जीतने से यह सीट भाजपा की पर परागत सीट बन गई है। हालांकि, हर बार भीमराज भाटी कांग्रेस से बगावत कर उनके सामने मैदान में उतर आते हैं और भाजपा के पारख की राह को आसान बना देते हैं और अपनी मूल पार्टी कांग्रेस को तीसरे न बर पर धकेल देते हैं। भाटी फिर मैदान में हैं। कांग्रेस बंट गई है और इस बार भी कमोबेश हालात पिछले चुनावों जैसे ही नजर आ रहे हैं। खैर, ये तो समय ही बताएगा मतदाता किसकी नाव पर सवार होते हैं।

विवेक वर्मा
पाली। मुद्दों की गर्मी से दहकती पाली की सियासी चौसर पर मतदाता अब तक मौन है। मैदान में उतरे प्रत्याशियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। भाजपा ने जहां अपने पुराने चेहरे विधायक ज्ञानचंद पारख पर एक बार फिर से भरोसा किया है। बीस साल से यहां के विधायक रहे पारख की छवि साफ सुथरी रही है, लेकिन पार्टी की भीतरी अशांति से पार्टी को खतरा है। कांगे्रस पार्टी पदाधिकारियों के लिए टिकट वितरण के लिहाज से हमेशा से पेचीदा रही इस सीट पर इस बार एक नए चेहरे महावीरसिंह राजपुरोहित को उतारा गया है। वह अपनी जमीन तैयार कर पाते उससे पहले ही ही पार्टी में अंदरूनी बगावत शुरू हो गई। कुछ पदाधिकारी तो इस्तीफा थमा कर खुलकर बागी और निर्दलीय भीमराज भाटी के साथ जुट गए हैं। कुछ ने अन्य शहरों व विधानसभा क्षेत्रों की ओर रुख कर लिया है।

बेबाक बयानी के लिए यात निर्दलीय भीमराज भाटी दोनों पार्टी प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। पाली विधानसभा क्षेत्र मूलभूत समस्याओं से अब तक जूझ रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां प्रगति तो हुई है लेकिन पाली की प्रदूषण की समस्या ने इस शहर की आर्थिक कमर तोड़ कर रख दी है। इस औद्योगिक अशांति के बीच वोटर इस चुनाव में दोराहे पर खड़ा है। प्रदूषण पाली के गले की फांस बन गया और कपड़ा उद्योग रूग्ण अवस्था में है। इससे यहां रोजगार की विकट समस्या खड़ी हो गई है। मजदूरों का पलायन ल बे समय से हो रहा है।

इससे स्थानीय बाजार पर भी विपरीत असर पड़ा है। वहीं चौराई क्षेत्र की प्रदूषण और पेयजल की समस्या अब भी मुंह बाए खड़ी है। शिक्षा के अच्छे केन्द्रों के अभाव के कारण यहां से विद्यार्थियों का पलायन परम्परा सी बन गई है। पिछले लम्बे समय से यहां चल रहा सीवरेज का काम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। अनियंत्रित व अव्यवस्थित कार्य के चलते पूरा शहर खुदा पड़ा है। रोहट क्षेत्र की पानी की समस्या अब भी जस की तस है। पिछले सालों में हालांकि कुछ पाइप लाइन योजना स्वीकृत होने के कारण व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है लेकिन अंदरूनी क्षेत्रों में अब भी ग्रामीण पेयजल तक के लिए तरस रहे हैं।

शहर के मुद्दे कायम
मिल गेट के राजू लखारा का कहना था कि सालों से शहर के मुद्दे वही हैं। फैक्ट्रियां बंद होने के कारण रोजगार की सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। गणेशनगर के पूनमचंद का कहना था कि उद्योग बंद होने के कारण बाहरी मजदूर तो पलायन कर गए लेकिन स्थानीय के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। मण्डली निवासी शेषाराम मानते हैं कि शहर के अव्यवस्थित विकास और अनदेखी के कारण औद्योगिक संकट खड़ा हुआ और पाली बीस साल पीछे चली गई। मण्डली के ही गुमान देवासी का कहना है कि पाली में नए उद्योग लगना जरूरी हैं। कपड़ा उद्योगों पर संकट के कारण पाली खत्म होता जा रहा है।

स्थानीय समस्याएं अधिक
चुनावों में स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। लम्बे समय से सीवरेज समस्या से परेशान हैं। गलियां खुदी हुई हैं। घरों से निकलना भी दूभर हो रहा है। घरों में रसोई भी महंगी हो गई है। -कोमल, गृहिणी

विकास को प्राथमिकता
पहली बार मतदान करने का उत्साह है। टीवी व समाचार पत्रों के माध्यम से चुनावों के बारे में देखा-जाना है। अपना वोट विकास के नाम पर ही दूंगी। -विशाखा, युवा मतदाता

दोनों प्रत्याशी का हाल क्या है?
ज्ञानचंद पारख, भाजपा
ताकत: सहज उपलब्धता, मिलनसार, आरएसएस से अच्छे सम्बंध, मेडिकल क्षेत्र में निशुल्क सेवा, हाल ही खुले उच्च शिक्षण संस्थानों को लाने में योगदान
कमजोरी: पिछले बीस साल से विधायक की सीट पर जमे, पार्टी की आंतरिक असंतुष्टता कार्यकर्ताओं में मनमुटाव

महावीरसिंह राजपुरोहित, कांग्रेस
ताकत: कांगे्रस पार्टी से टिकट- प्रदूषण के विरुद्ध लम्बी लड़ाई, युवा, चौराई क्षेत्र में मतदाताओं पर पकड़ कमजोरी: शहरी क्षेत्र में लोगों तक नहीं पहुंच, पार्टी की आंतरिक कलह, कांगे्रस के बागी से अधिक खतरा जातीय समीकरण

जातीय गणित पाली विधानसभा
पटेल - 24000
जैन -23000
घांची - 5500
कुम्हार -8000
जाट -6600
ब्राह्मण -12000
राजपूत - 12500
एससी -42000
मुस्लिम -29000
रावणा राजपूत -8000

पन्द्रह साल से विधायक
2003 - ज्ञानचंद पारख
2008 -ज्ञानचंद पारख
2013 - ज्ञानचंद पारख

कुल मतदाता
कुल - ï 2 लाख 48 हजार 816
महिला-ï 1 लाख 29 हजार 671
पुरुष - 1 लाख 19 हजार 144



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