जैसलमेर. दिसम्बर महीने का आगाज हो चुका है, लेकिन अभी तक ठिठुरन देने वाली सर्दी का अहसास नहीं हो रहा है। हालांकि सुबह व शाम को शीतल हवाएं गुलाबी सर्दी का अहसास कराती है, लेकिन दोपहर में तल्ख धूप का असर बना हुआ है। न तो घरों में गर्म लिबासों की सार-संभाल शुरू हुई है और न ही लोगों ने गर्म लिबास ही पहनना शुरू किया है। सर्दी के लिहाज से दिसम्बर महीना महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन अभी तक न तो दोपहर में धूप सुहा रही है और न ही सुबह व शाम को दांत किटकिटाते लोग देखने को मिल रहे हैं। हकीकत यह भी है कि घर हो या दफ्तर या फिर दुकानें, पंखे हर जगह चलते देखे जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग का असर इस बार सर्द मौसम पर भी देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि शहर हो या गांव, गर्म लिबास का प्रचलन अभी तक शुरू नहीं हुआ है। यही नहीं दोपहर में तो चिलचिलाती धूप से बचने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों को दोपहर में छाते, रुमाल तक का उपयोग करना पड़ा है। मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्दी देरी से आने का मुख्य कारण ग्लोबल वाॄमग और जलवायु में हो रहा बदलाव है।
तीन वर्षों से भ्रमित कर रहा मौसम का मिजाज
अमूमन माना जाता है कि सरहदी जैसलमेर जिले में दिसम्बर महीने के पहले सप्ताह में सर्दी चमकती है, लेकिन गत तीन वर्षों में नवम्बर के अंतिम सप्ताह व दिसंबर के पहले सप्ताह में अधिकतम व न्यूनतम तापमान के आंकड़ों पर नजर डाले, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि गर्मी का सितम अभी तक पूरी तरह जैसाण से थमा नहीं है और सर्दी के आगाज में अभी समय लग सकता है। वैसे, स्वर्णनगरी के मुख्य बाजारों में स्थानीय दुकानदारों ने भांति-भांति के स्वेटर, जैकेट और अन्य गर्म वस्त्रों को सजा दिया है, लेकिन अभी तक ग्राहकों का इंतजार बना हुआ है।
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