श्रीगंगानगर. मिर्जेवाला रोड पर स्थित नगर परिषद की नंदीशाला में पकड़े गए 664 निराश्रित पशुओं के रखरखाव पर हर साल दो करोड़ रुपए का बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन इन पशुओं की सार संभाल के लिए सिर्फ दो ही कार्मिकों की डयूटी लगी है। इस कडकड़़ाती ठंड में इन दोनों कार्मिकों में से एक तो बीमार भी है। लेकिन परिषद के अधिकारी सिर्फ ठेकेदारों के चेक काटने के सिवाय कोई काम नहीं किया, नतीजतन पिछले चार दिनों में चौदह पशुओं की मौत के खुलासे ने नगर परिषद की हकीकत बयां कर दी।इस अव्यवस्था के खिलाफ बुधवार को कई गौसेवकों ने नगर परिषद में हंगामा कर दिया। इन गौसेवकों ने नगर परिषद सचिव लाजपत बिश्नोई और नंदीशाला के प्रभारी जुबेर खान से सवालों की झड़ी लगा दी। इन दोनों अधिकारियों ने खामियों को दूर करने की बात कही लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हुए। गौसेवकों ने आयुक्त के कक्ष के बाहर धरना लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। इन लोगों का कहना था कि हर साल दो करोड़ रुपए का भारी भरकम बजट खर्च करने के बावजूद निराश्रित पशुओं के रखरखाव के लिए स्टाफ तक नहीं है।
इस बीच बुधवार शाम को आयुक्त अशोक असीजा ने खुद नंदीशाला का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वहां सिर्फ दो कार्मिकों की ही डयूटी होने पर हैरानगी भी जताई। इस संबंध में जांच कमेटी के आदेश किए गए हैं।
नगर परिषद की तत्कालीन आयुक्त सुनीता चौधरी ने लेखा सहायक मदनलाल डूडी को नंदीशाला का प्रभारी बनवाया था। चार महीने पहले जब पशुओं की मौत को दबाने की शिकायत आई तब उपसभापति अजय दावड़ा लक्की की अगुवाई में पार्षदों ने हंगामा किया था, तब डूडी पर आरोप लगा कि उन्होंने चारा सप्लाई का ठेका अपने रिश्तेदार को दे दिया। इस शिकायत पर डूडी को हटाकर वहां राजस्व अधिकारी जुबेर खान को जिम्मेदारी दे दी। राजस्व अधिकारी खान ने स्वीकारा कि नंदीशाला में सबकुछ ठीक नहीं है। लेकिन उनकी टिप्पणी को परिषद आयुक्त ने गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन वहां पशु लगातार मरते रहे और यह सिलसिला जारी रहा। ज्ञात रहे कि आरटीई कार्यकर्ता अनिल गोदारा ने इस नंदीशाला में जाकर वीडियो बनाकर जिला कलक्टर को दे दी थी, दो दिन पहले दी गई वीडियो में दावा किया गया था कि लगातार पशु मर रहे हंै लेकिन वहां जीवित पशुओं के रखरखाव के लिए नगर परिषद प्रशासन कुछ भी नहीं कर रहा है। यहां तक कि पशुओं के पीने का पानी नगर परिषद के अग्नि शमन सेवा केन्द्र की दमकल की गाडिय़ों से भिजवाया जाता है।
गौरतलब है कि करीब नौ साल पहले निराश्रित पशुओं के लिए नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त राजेन्द्र मीणा ने बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी से मिलकर सूरतगढ़ रोड पर गौशाला का संचालन किया था। वहां पशुओं के मरने की घटनाएं जब उजागर हुई तो लोगों ने हंगामा कर दिया था। शिव सेना की ओर से अदालत में इस्तगासा भी दायर किया गया था, इस मामले में बिहाणी और मीणा दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अब तक जारी है। इस प्रकरण से नगर परिषद प्रशासन ने सबक नहीं लिया है।





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