फसलों में जमने लगी बर्फ
प्रतापगढ़ गत दिनों से कड़ाके की सर्दी का असर जिले में जारी है। इससे जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। वहीं लगातार शीतलहर चलने से फसलों में भी नुकसान की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में भूमिपुत्रों में चिंता होने लगी है।कांठल में शीतलहर और सर्दी लगातार बढ़ती जा रही है।शीतलहर के कारण कई फसलों में असर देखा जा रहा है। वहीं कई खेतों में पाला पडऩे की आशंका है। सर्दी के कारण लोग दिनभर गर्म वस्त्रों में लिपटे नजर आए। सुबह के समय सर्दी का असर अधिक होने से लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे है।वहीं दोपहर को भी लोग धूप सेकते नजर आए।शाम को भी बाजार जल्दी सूने हो रहे है। तापमान भी कम हो गया है। रात का तापमान न्यूनतम 7 डिग्री तक पहुंच गया है।
पाले की बढ़ रही संभावना
इन दिनों जिले में पाले की संभावना बढ़ गई है। शीतलहर एवं पाले से सर्दी के मौसम में सभी फसलों को नुकसान होता है। टमाटर, मिर्च, बैंगन आदी सब्जियों पपीता एवं केले के पौधों एवं मटर, चना, अलसी, सरसों, जीरा, धनिया, सौंफ, अफीम आदि फसलों से सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है।
यह दिख रहा प्रभाव
पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलसे हुए दिखाई देते हैं एवं झड़ जाते हैं। फलियों एवं बालियों में दाने नहीं बनते हैं। रबी फसलों में फुल आने एवं बालियां/ फलियां आने व बनते समय पाला पडऩे की सर्वाधिक संभावनाएं रहती है। इस समय कृषकों को सतर्क रहकर फसलों की सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए। पाला पडऩे के लक्षण सर्वप्रथम आंकड़े वनस्पतियों पर दिखाई देते हैं।
पाला पडऩे के कारण
पाले का पौधों पर प्रभाव शीतकाल में अधिक होता है। जब तापमान काफी कम हो जाता है, हवा रुक जाती है, तो रात्रि को पाला पडऩे की संभावना रहती है। वैसे साधारणता पाले का अनुमान दिन के बाद के वातावरण से लगाया जा सकता है। रात को विशेष तीसरे एवं चौथे पहर में पाला पडऩे की संभावनाएं रहती हैं। हवा रुकने व आसमान साफ हो तो पाला पड़ता है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक है।
शीतलहर एवं पाले से फसल की सुरक्षा के यह करें उपाय
इन दिनों पाला पडऩे की संभावना अधिक हो गई है। ऐसे में पाले से फसल की सुरक्षा के उपाय करना चाहिए।इसे लेकर कृषि विभाग भी सतर्क हो गया है।कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डॉ. योगेश कन्नोजिया ने बताया कि जिस रात पाला पडऩे की संभावना हो उस रात को खेत की उत्तरी पश्चिमी दिशा से आने वाली ठंडी हवा की दिशा में खेतों के किनारे पर बोई हुई फफल के आसपास, मेड़ों पर रात्रि में कूड़ा-कचरा या अन्य व्यर्थ घास-फूस जलाकर धुआंं करना चाहिए। ताकि खेत में धुआं हो जाए एवं वातावरण में गर्मी आ जाए। सुविधा के लिए मेड पर 10 से 20 फीट के अंतराल पर कूड़े करकट के ढेर लगा कर धुआं करें। धुआ करने के लिए उपरोक्त पदार्थों के साथ क्रूड ऑयल का प्रयोग भी कर सकते हैं। इस विधि से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान आसानी से बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा पाला पडऩे की संभावना हो तब खेत में सिंचाई करनी चाहिए। नमीयुक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापमान कम नहीं होता है। इस प्रकार पर्याप्त नमी नहीं होने पर शीतलहर व पाले से नुकसान की संभावना कम रहती है। जिन दिनों पाला पडऩे की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिडक़ाव करना चाहिए। छिडक़ाव का असर 2 सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब के छिडक़ाव को 15-15 दिन के अंतराल पर दोहराते रहे।
मेरियाखेड़ी क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी का असर जारी है। हालात यह है कि फसलों में बर्फ जमने लगा है। वहीं खेतों पर रखवाली के लिए किसान भी कम जा रहे है। खेतों के किनारे बिस्तर पर भी बर्फ जमने लगी है। यही हाल मेरियाखेडी में गुरुवार को भी देखा गया। सुबह एक खेत की मेड पर सोए किसान के बिस्तर पर बर्फ जम गई।
धोलापानी क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी के कारण फसलों में नुकसान की संभावना बढ़ गई है।इससे किसानों में भी चिंता सताने लगी है।कई खेतों में गुरुवार सुबह भी बर्फ जम गई।जो सुबह आठ बजे तक भी देखी गई।





No comments:
Post a Comment