जयपुर। राज्य की सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस में एक के बाद एक घमासान होने के हालात बन रहे हैं। बहुमत मिलने के बाद सत्ता में आने का मौका मिला तो मुख्यमंत्री के लिए दिल्ली में चार दिन उठा-पटक चली।
मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की शपथ हुई तो मंत्री को लेकर फिर दिल्ली में 3 दिन मंथन चलता रहा। अब मंत्रिमण्डल से बाहर रखे गए दर्जनभर से ज्यादा वरिष्ठ विधायकों को 'सैटल' करने को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है।
प्रदेश कांग्रेस में जीतकर आए दर्जनभर से ज्यादा वरिष्ठ विधायक ऐसे हैं, जिनका राज्य मंत्रिमण्डल में आना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन वरिष्ठों के बजाय युवा और नए विधायकों को ज्यादा तवज्जो दी गई है।
23 मंत्रियों में मात्र 6 विधायक ऐसे शामिल किए गए हैं, जो पहले मंत्री रहे हैं। शेष 17 विधायकों को पहली बार मंत्री पद से नवाजा गया है। इससे नाराज वरिष्ठ विधायकों ने अंदर खाने मोर्चा खोल दिया है।
कई वरिष्ठों ने मीडिया में भी अंदर खाने नाराजगी जाहिर की। कुछ नेताओं के समर्थकों ने भी हंगामा किया और मंत्री बनाए जाने की मांग की। मंत्री नहीं बनाए जाने से वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों ने कुछ स्थानों पर इस्तीफे भी दे दिए।
वरिष्ठों की नाराजगी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के कानों तक भी पहुंच गई है। माना जा रहा है कि पार्टी इन वरिष्ठों को खुश करने को लेकर कवायद कर रही है।
बताया जा रहा है कि वरिष्ठों में कुछ को राजस्थान आवासन मण्डल अध्यक्ष सहित अन्य कुछ प्रमुख मण्डल व अन्य जगह बिठाया जा सकता है। इसी तरह एससी आयोग, विप्र बोर्ड, महिला एवं बाल आयोग और देवनारायण बोर्ड में भी किसी को आसीन कर सकते हैं।
इसको लेकर कांग्रेस प्लान-बी पर काम कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष के महत्वपूर्ण पद पर भी इन्हीं में से एक चुना जाना है। इनमें से लोकसभा चुनाव में उतारे जाने को लेकर भी चर्चा है। इनमें सी.पी. जोशी, महेन्द्रजीत सिंह और बृजेन्द्र ओला हो सकते हैं।
प्लान बी में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सी.पी. जोशी, पूर्व मंत्री ब्रजेन्द्र ओला, महेन्द्रजीत सिंह, पूर्व विद्य अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत, परसराम मोरदिया, सात बार के विधायक और राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, हेमाराम चौधरी, राजेन्द्र पारीक, डॉ. जितेन्द्र सिंह, दो बार की विधायक शकुंतला रावत और जाहिदा बेगम हैं।





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