साध्वी के नगर विहार पर छलक पड़ी श्रद्धालुओं की आंखें
भाग्य से मिलता है गुरु भगवंत का सानिध्य
बाड़मेर . शहर के जैन न्याति नोहरा में रविवार को खरतरगच्छ जैन संघ की ओर से साध्वी सुरंजना के चातुर्मास पूर्ण होने पर विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साध्वी ने कहा कि जिंदगी में दुर्जन से दूर रहो। आपकी ताकत पर मुझे भरोसा है, इसलिए मैं जा रही हूं, तुम गिरोगे नहीं, बैलेंस बिगड़े तो मेरे शब्दों को याद करना मैं तुम्हें बचा लूंगी। उन्होंने कहा कि पतंग जाती है तो लूटने का मन होता है, प्रेम व दया की पतंग सदैव उड़ाना, अहम व क्रोध की पतंग को काटना है। उन्होंने कहा गुरु भगवंत का संयोग मिल जाना भाग्य है। आपके जीवन में परिवर्तन बना रहे यही शुभकामनाएं। इस मौके पर साध्वी सुरंजना के साथ सिद्धांजना, मित्रांजना , सौम्यांजना, दर्शनांजना, नम्रतांजना को विदाई दी गई।
जैन श्रीसंघ अध्यक्ष सम्पतराज बोथरा ने विचार व्यक्त किए। नाकोड़ा ट्रस्ट पूर्व अध्यक्ष अमृतलाल जैन ने आभार जताया। खरतरगच्छ संघ की ओर से काम्बली अर्पित की। संचालन वीरचंद भंसाली ने किया। कार्यक्रम के बाद साध्वी का नाकोड़ा तीर्थ की ओर विहार हुआ। प्रथम पड़ाव स्टेशन रोड स्थित जैन भोजनशाला में रहा।
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भागवत में है जीवन का सार जो करवाती है कत्र्तव्य बोध
शिव ञ्च पत्रिका . क्षेत्र के हड़वेचा गांव स्थित देवल माता मंदिर के पास चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को महाराज राजेंद्रकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के विवाह, कृष्ण सुदामा मिलन, सुदामा चरित्र व कृष्ण लीलाओं पर प्रवचन किए।
इस दौरान कथा वाचक ने भागवत का महत्व बताते हुए कहा कि कलयुग में केवल भागवत कथा सुनने मात्र से समस्त पापों का निवारण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। भागवत कथा में जीवन का सार समाहित है। श्रीमद्भागवत जीवन का संपूर्ण विज्ञान है जो हमें कत्र्तव्य का बोध कराती है। जो व्यक्ति संतों के सान्निध्य में आता है उसका जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कृष्ण सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विपत्ति में काम आने वाला ही सच्चा मित्र होता है।
इसी दौरान उन्होंने द्वारपालों कन्हैया से कह दो... भजन की प्रस्तुति दी। उन्होंने कृष्ण-कृष्ण..., राधे-राधे... सहित अन्य भजनों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को कृष्णमय बना दिया। कथा के समापन अवसर पर ग्राम वासियों के लिए प्रसाद वितरण किया गया।





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