जयपुर. मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ कार्यक्रम के साथ ही अब मंत्रिमंडल गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालांकि यह कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। मुख्यमंत्री पद को लेकर जिस तरह के विवाद की खबरें सामने आई है, उससे लग रहा है कि मंत्रिमंडल में दोनों नेता अपने-अपने नजदीकियों को अधिक से अधिक मंत्री बनवाने का प्रयास करेंगे। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दखल के बिना मंत्रिमंडल बनता नहीं दिख रहा है।
विधानसभा में मिली जीत को कांग्रेस कुछ महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में बरकरार रखना चाहती है। ऐसे में प्रदेश में बन रही सरकार में कांग्रेस अनुभवी, युवा, जातीय और क्षेत्र का संतुलन करना चाहती है। कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेता चुनाव जीत कर आए हैं, जो अशोक गहलोत और सचिन पायलट में समान है। ऐसा माना जा रहा है कि पहली सूची में वरिष्ठ नेताओं को तो मौका मिल सकता है, लेकिन गहलोत और पायलट के नजदीकी विधायकों को मंत्री बनने के लिए कुछ दिन इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं जिलों के अनुसार देखें तो करीब 13 जिलों में कांग्रेस का बेहतरीन प्रदर्शन रहा है।
इनके नामों की चर्चा
मंत्री को लेकर शांति धारीवाल, दीपेंद्र सिंह शेखावत, मास्टर भंवरलाल मेघवाल, महेंद्रजीत सिंह मालवीया, बृजेंद्र सिंह ओला, हेमाराम चौधरी, बी.डी. कल्ला, भरत सिंह, परसादी लाल मीना, लालचंद कटारिया, प्रमोद जैन भाया, दयाराम परमार, रमेश मीना, डॉ. रघु शर्मा, प्रताप सिंह खाचरियावास, हरीश चौधरी, सलेह मोहम्मद, मुरालीलाल मीना, भंवर सिंह भाटी, मंजू मेघवाल, अशोक चांदना, जाहिदा के नामों को लेकर चर्चा है। इनके अलावा पार्टी निर्दलीय व समर्थन दे चुकी बसपा के भी विधायकों को मंत्री पद दे सकती है, इनमें संयम लोढ़ा, बाबूलाल नागर, महादेव सिंह खण्डेला और वाजिब अली का नाम मुख्य रूप से बताया जा रहा है।
महिलाओं को प्रतिनिधित्व
कांग्रेस से इस बार 11 महिलाएं विधायक चुन कर आई है। इनमें शंकुतला रावत, निर्मला सहरिया, जाहिदा खान, कृष्णा पूनिया, गंगादेवी, मनीषा पंवार, दिव्या मदेरणा, मीना कंवर, मंजू देवी, इंद्रा, ममता भूपेश शामिल है।
संभागवार स्थिति
संभाग संख्या
जयपुर 29
जोधपुर 16
उदयपुर 10
अजमेर 13
बीकानेर 11
भरतपुर 13
कोटा 07
जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर में दौड़ अधिक
कांग्रेस के जयपुर, जोधपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग में अधिकांश बड़े नेताओं ने चुनाव जीता है। यही कांग्रेस की अधिकांश सीटों पर कब्जा भी हुआ है। ऐसे में यहां से अधिक संख्या में मंत्री बनते दिख रहे हैं। जबकि कोटा और उदयपुर से कुछ बड़े नेताओं को मंत्री बनने का मौका मिल सकता हैै।





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