हत्या के बाद संदूक में बंद करके रखा था शव: अन्य आरोपित महिला मफरूर घोषित
नीमकाथाना. अपर सेशन न्यायाधीश गोविन्द वल्लभ पंत ने हत्या के बाद शव को संदूक में बंद कर शाहपुरा रोड स्थित रेलवे फाटक के पास पांच वर्ष पहले रखने के मामले में एक आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में एक महिला आरोपित को न्यायालय ने मफरूर घोषित किया है। आरोपित उत्तरप्रदेश के महोखर हाल जयपुर के करीरी की चित्रकूट धाम चैतन्य गौशाला निवासी हीरालाल उर्फ हीरादास अवस्थी है। इस मामले में लखनऊ निवासी मानसपुत्री उर्फ गायत्री शुक्ला को मफरूर घोषित कर दिया है। प्रकरण के अनुसार वर्ष २०१३ में १६ अक्टूबर को रेलवे फाटक के पास एक बड़ा संदूक लावारिस हालत में पड़ा मिला था। संदूक के उपर एक पुराना कूलर रखा था। क्षेत्र के लोगों ने
पहले तो इस संदूक पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन इसके बाद संदूक पर मक्खियां भिनभिनाने लगी। एेसे में इसकी सूचना पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संदूक को खोला तो उसमें रजाई में लिपटा हुआ एक शव मिला। शव की मौके पर पहचान नहीं हो पाई, लेकिन उस पर रखे कूलर ने पुलिस की राह को आसान कर दिया। पुलिस ने कूलर पर लिखे मैकेनिक के नंबरों के आधार पर जांच कर शव की पहचान रामू लाल उर्फ रामजी लाल मीणा के रूप में की। मामले की जांच में सामने आया कि हीरालाल तथा मानसपुत्री गौशाला में रहते थे। वहीं पर रामू उर्फ रामजी भी काम करता था। दोनों ने योजनाबनाकर रामू उर्फ रामजी मीणा की हत्या कर दी। बाद में शव को रजाई में लपेट कर संदूक में रख लिया। किराए के ऑटो में संदूक और कूलर लेकर नीमकाथाना आ गए। यहां पर संदूक पर कूलर रखकर चले गए। इस मामले में मानसपुत्री अभी फरार है। न्यायालय ने हीरादास को आजीवन कारावास और दस हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।





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