जैसलमेर. देश-दुनिया के पर्यटकों के पसंदीदा स्थलों में सम्मिलित जैसलमेर शहर में अतिक्रमणों की मानो बाढ़ ही आ गई है। गत चार सालों के दौरान सैकड़ों की तादाद में अतिक्रमणों और अवैध कब्जों के कारण करोड़ों रुपए मूल्य की बेशकीमती सरकारी जमीन खुर्दबुर्द की जा चुकी है। जैसलमेर नगरपरिषद बोर्ड उन्हें हटाने की इच्छाशक्ति का प्रदर्शन इक्का-दुक्का अवसरों को छोडक़र कभी नहीं दिखा पाया। गत दो महीनों के दौरान जब से विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगी थी, तब से नगरपरिषद की खाली जमीन को कब्जाने की तो मानो होड़-सी मच गई। अतिक्रमणकारी शहर की कच्ची बस्तियों के साथ बाहरी क्षेत्र की खाली जमीन पर ही नहीं बल्कि अहम स्थानों तथा आम रास्तों तक पर कब्जा करने से बाज नहीं आ रहे। चंद रोज पहले ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में करीब 20 करोड़ रुपए कीमत वाली जमीन से कब्जे हटाने की नगरपरिषद की कार्रवाई से एक बार फिर यह उम्मीद जगी है कि अवैध कब्जाधारियों से सख्ती से निपटा जाएगा।
फटाफट कब्जा और निर्माण
पिछले सालों के दौरान जैसलमेर के विभिन्न आवासीय और वाणिज्यिक महत्व वाले स्थानों में तुरंत सरकारी जमीन पर कब्जा जमाकर वहां मनमाफिक निर्माण कार्य करवाने की परिपाटी-सी बन गई। नगरपरिषद का अतिक्रमण हटाओ दस्ता खामोशी ही बना रहा। वर्तमान में एक के बाद एक कई निर्माण कार्य हो चुके हैं, जहां वाणिज्यिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। इन जमीनों पर काबिज व्यक्तियों के पास मालिकाना हक कहां से आया, यह अपने आप में जांच का विषय है। कुछ अर्सा पहले इसी क्षेत्र में नगरपरिषद ने कार्रवाई करते हुए एक बड़े भूखंड को जहां रेस्टोरेंट और अन्य दुकानों का संचालन किया जा रहा था, को हटाया। इसके अलावा और कोई कार्रवाई वहां नहीं की गई। एयरफोर्स द्वार के आसपास की खाली जमीन और बसी बस्तियों में पिछले सालों के दौरान कब्जे करने की कोशिशें जारी है। आवासीय कॉलोनियों में तो पार्क आदि के लिए निर्धारित जमीन तक को नहीं छोड़ा गया।
बढ़ती जा रही कच्ची बस्तियां
जैसलमेर की कच्ची बस्तियां तो अतिक्रमणकारियों के लिए सबसे आसान शिकार हैं। एक के बाद एक ऐसी कई बस्तियां अवैध कब्जों के कारण बसती चली गई हैं। दबंग किस्म के कईलोगों ने इन बस्तियों में जमीनों पर कब्जे कर उन्हें आगे से आगे बेच भी दिया है। यह एक तरह का लाखों-करोड़ों की कमाईका व्यवसाय बन गया। रियासतकालीन पुराने षहर के गली-मोहल्लों में भी मकान-दुकान आदि के निर्माण के दौरान सार्वजनिक महत्व वाली जमीनों पर कब्जा करने की कईघटनाएं पिछले अर्से के दौरान घटित हुई हैं। इसके चलते आपसी विवाद भी हुए। कई शिकायतें नगरपरिषद व जिला प्रषासन तक पहुंची, लेकिन उन पर सार्थक कार्रवाई नहीं होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते चले गए। सूत्र बताते हैं कि मिलीभगत के खेल में गड़बड़झाला हो रहा है।
बहाने ही बनाती रही परिषद
वर्तमान नगरपरिषद बोर्ड की तरफ से अवैध कब्जों और अतिक्रमणों के खिलाफकार्रवाई करने में हमेशा आगा-पीछा ही किया। परिषद ने कभी पुलिस की इमदाद नहीं मिलने तो कभी कार्मिकों की कमी का बहाना बनाया। कई बार बहुत धूम-धड़ाके से कब्जे हटाने के अभियान शुरू भी किए गए, लेकिन वे सिरे नहीं चढ़ पाए। हनुमान चौराहा से गड़ीसर चौराहा तक के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों और पुराना ग्रामीण बस अड्डा आदि इलाकों में भी अतिक्रमणों व अवैध कब्जों को हटाया नहीं जा सका।
प्रभावी कोशिश करेंगे
जैसलमेर नगरपरिषद क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमणों के खिलाफअ प्रभावी कार्रवाई करने की पूरी कोशिश की जाएगी। उडऩदस्ता को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
-पवन कुमार, आयुक्त, नगरपरिषद, जैसलमेर





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