सवाईमाधोपुर . रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में गुरुवार को बाघ द्वारा महिला नरौती को मौत के घाट उतार देने की घटना ने लोगों को बाघ टी-24 की याद ताजा कर दी। बाघ टी-24 ने रणथम्भौर में एक के बाद एक चार लोगों को मार दिया था। ऐसे हालत में सरकार ने सुरक्षा की दृष्टि से उसे सज्जनगढ़ पार्क में शिफ्ट किया था। रणथम्भौर में बाघ के हमले की फिर हुई घटना से अब सवाल खड़ा हो रहा है कि ये बाघ भी क्या फिर से किसी इंसान को अपना शिकार बनाएगा। क्या वह टी-24 की तरह उग्र एवं मैन किलर बन जाएगा। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से इस तरह की बात से इनकार किया है। वन विभाग की ओर से राजबाग एरिया में बाघ टी-57 व बाघ टी-98 की मॉनिटरिंग तेज कर दी है। वहीं जगह-जगह कैमरे लगाए हैं। संभवतया शनिवार को इन कैमरों की जांच होगी। इसमें बाघों का पता चल सकेगा। मौके पर शुक्रवार को बाघ-बाघिन के पगमार्क भी मिले।
दस मौंतों में से सिर्फ एक ही जंगल के बाहर मारा गया था
जानकारी के अनुसार पिछले 13 साल में रणथम्भौर में बाघ के हमले में दस लोगों की जानें गई थी। इनमें से सिर्फ 2005 में बाघ के हमले में मेई कलां निवासी शंकर जाट की मौत हुई थी। वह जंगल के बाहर की घटना थी। इसके अलावा जो भी बाघ के हमले में मारे गए, वे सभी जंगल के अंदर ही थे।
टी-24 ने मारा था चार को
रणथम्भौर में बाघ टी-24 ही एक ऐसा बाघ था जिसने चार लोगों को मारा था। इनमें सबसे पहले खिरनी निवासी घमण्डी सैनी को, दूसरे हमले में अंसारी मोहल्ले निवासी अशफाक, तीसरे में वनकर्मी घीसू सिंह व चौथे हमले में वनकर्मी रामपाल सैनी को मारा था। रणथम्भौर के आंकड़ों के अनुसार इस बाघ केअलावा अन्य किसी भी बाघ ने एक बार किसी इंसान को मारने के बाद दुबारा हमला नहीं किया।
आत्मसुरक्षा के लिए बाघ ने हमला किया होगा
इस बारे में वनाधिकारियों का कहना है कि ये महिला पार्क की सुरक्षा दीवार से करीब एक किलोमीटर तक अंदर जंगल में चली गई थी। वहां पर गाढाडूब एनिकट नाम से वाटर पॉइंट भी है। माना जा सकता है कि महिला बाघ की टरेट्री में घुसी तो बाघ को खतरा महसूस हुआ होगा। उसने अपने बचाव में महिला पर हमला बोल दिया। हमलावर बाघ टी-57 व टी-98 होसकते हैं।स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य डॉ. धर्मेन्द्र खांडल से बाघ के नरभक्षी होने एवं लोगों की सुरक्षा कैसे हो, इस विषय पर सवाल किए तो उन्होंने अपने जवाब कुछ इस तरह दिए।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सवाल 1.-नरभक्षी बाघ किसे कहते हैं?
जवाब-नियमों के अनुसार जब कोई बाघ तीन या चार इंसानों को मार देता है तो सरकार उसे असुरक्षित मानते हुए नरभक्षी घोषित करती है। फिर उसे दूसरी जगह शिफ्ट करती है।
सवाल 2. क्या नरौती को मारने वाला बाघ नरभक्षी हो सकता है?
जवाब-जिस बाघ ने उसे मारा, उसका पहला हमला है। ऐसे में एक बार किए हमले से नरभक्षी की पहचान नहीं की जा सकती है। हो सकता है बाघ ने आत्म सुरक्षा की वजह से हमला किया हो। दूसरी ओर नरभक्षी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सवाल -3 ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या किया जाए?
जवाब-रणथम्भौर के इतिहास में बाघ के हमले में 11 मौतें हुई हैं। इनमें से 10 जंगल के अंदर हुई है। पैदल घूमने वाले, घास व लकड़ी काटने वाले, मंदिर जाने वाले आदि को जंगल में अकेले जाने से बचाना चाहिए। पानी वाले स्थानों पर तो जाना ही नहीं चाहिए। वहां बाघ व अन्य वन्यजीवों को मूवमेंट ज्यादा रहता है।
सवाल -4 टाइगर सामने आ जाए तो क्या करें?
जवाब- अगर टाइगर सामने आ जाए तो पीठ दिखाकर भागना ठीक नहीं। इससे टाइगर को लगता है कि वह उसके लिए शिकार है। अगर दो-तीन लोग भी हैं तो जोर-जोर से हल्ला करना चाहिए। लाठी या डंडे से बचाव का प्रयास करना चाहिए। हालांकि मेरे लिए ये कहना आसान है, लेकिन इसके लिए बड़े साहस की जरूरत होती है।
रणथम्भौर में जिस भी बाघ ने महिला को मारा था। उसने पहली बार ऐसा किया है। पहली बार किए हमले को नरभक्षी नहीं कह सकते। हो सकता है कि बाघ ने इंसानी घुसपैठ को देखते हुए बचाव में महिला पर हमला कर दिया हो।
संजीव शर्मा, सहायक वन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर





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