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इवीएम में प्रत्याशियों किस्मतइवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत, बाहर कयासों का दौर

अश्वनी प्रताप @ राजसमंद. लोकतंत्र का महोत्सव खूब धूमधड़ाके से मनाया गया, हर वर्ग ने इसमें वोट रूपी आहुति देने में बढ़चढ़ कर भागीदारी निभाई। ‘भाग्यविधाताओं’ ने जिले के 47 प्रत्याशियों के भविष्य को ईवीएम में कैद कर दिया। अब थके प्रत्याशी हारजीत का फैसला भगवान के भरोसे छोडक़र राहत की सांस ले रहे हैं, लेकिन समर्थक और मतदाताओं के मन में भारी उथल-पुथल है, जिसकी झलक शहर, गांव में चाय की थडिय़ों, चौराहों, नुक्कड़ों पर आसनी से दिख रही है। हर आम और खास आदमी की विशेष राय है, पार्टी से लेकर प्रत्याशी तक की हारजीत के उसके अपने ही समीकरण है।
शहर के कांकरोली चौपाटी पर स्थित एक चाय की थड़ी पर शनिवार सुबह साढ़े ११ बजे, दो युवा, तीन वयस्यक बातें कर रहे थे। चाय की चुस्की के बीच युवा महेश बोला, काका मैंने कहा था वोट (एक प्रत्याशी का नाम लेते हुए) उन्हें देना, क्योंकि सरकार उनकी ही बन रही है, इसलिए विकास होगा। तभी चाय बनाते बनाते चाय वाले ने कहा नहीं वह तो जीत ही नहीं सकते। जीत तो उनकी होगी (दूसरे प्रत्याशी का नाम लिया), और जीत के समीकरण ऐसे बताने लगा जैसे सारे आंकड़ों का पूरा अध्ययन हो, और बहस का सिलसिला जारी रहा। इसीतरह दोपहर १२ बजे चलचक्की के पास मौजूद एक निजी कार्यालय में पांच छह लोग बैठे थे, और अपने-अपने चुनावी समीकरण प्रस्तुत कर रहे थे, जिसमें केवल राजसमंद जिला ही नहीं पूरे प्रदेश की का विश्लेषण था, हर सीट पर उनका नजरिया था, महंगाई से लेकर पेट्रोल, डीजल, लोकसभा चुनाव के मायने सब शामिल थे। राजसमंद से फला प्रत्याशी, इतने वोटों से जीतेगा, क्यों जीतेगा, और किसके वोट उसे मिले हैं, किसके साथ भीतरघात हुआ है। एक बार तो बहस इतनी बढ़ी की ‘सटीक जुबान’ वाले को बुलाया गया। बताया गया कि यह व्यक्ति जो बोल देता है वही होता, फिर उसने एक कुशल नेता की तरह अपने समीकरण पेश किए। सुबह १०.१५ बजे राजनगर के पास स्थित एक चाय की थड़ी पर आठ नौ लोग बैठे थे और हर व्यक्ति अपने-अपने प्रत्याशी को जीत दिला रहा था। ऐसा ही मिला-जुला असर हर विधानसभा में हर गांव-ढाणी में देखने को मिला। चुनाव परिणाम को लेकर प्रत्याशियों से ज्यादा उथल-पुथल उनके समर्थकों में दिखी।



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