समितियों में भी पहुंच रहा यूरिया
प्रतापगढ़ प्रतापगढ़ जिले में इन दिनों मांग के अनुरूप यूरिया की आपूर्ति सहकारी समितियों में होने लगी है।वहीं बाजार में भी यूरिया की आपूर्ति पर्याप्त है।
इसके अलावा कांठल में रबी फसल की बुवाई प्रदेश के अन्य इलाकों की तुलना में करीब एक माह पहले ही की जाती है।ऐसे में जिले में रबी की फसल में यूरिया की आवश्यकता भी अब कम ही है। जिले में गेहूं की फसल में गत माह यूरिया की अधिक आवश्यकता थी। जिस कारण किसानों को किल्लत का सामना करना पड़ा था।वहीं बाजार में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता थी।अब यूरिया की आवश्यकता कम हो रही है।
गत दो दिनों से हो रही आपूर्ति
जिले में गत दो दिनों से सहकारी समितियों में भी आपूर्ति मांग के आधार पर होने लगी है। प्रतापगढ़ क्षेत्र में दो दिन में 250 टन, छोटीसादड़ी में 200 टन, धरियावद में 75 टन और पीपलखूंट में 60 टन की आपूर्ति हो चुकी है।वहीं अरनोद इलाके में अभी आपूर्ति नहीं हुई है। ऐसे में यहां भी करीब 100 टन की आपूर्ति एकाध दिन में होने की संभावना है। रैक लगने पर गाडिय़ां यहां भेजी जाएगी।
रैक पाइंट से प्रतापगढ़ की दूरी अधिक
प्रदेश के अंतिम छोर पर प्रतापगढ़ जिला होने से यहां परेशानी भी होती है।यही हाल यूरिया की आपूर्ति में होता है। यहां यूरिया की आपूर्ति के रैंक पाइंट भी दूरी पर है। चित्तौडगढ़़ और उदयपुर में रैक पाइंट है।ऐसे में वहां से प्रतापगढ़ के लिए गाडिय़ों का लाने में दूसरी अधिक होने से गाडिय़ां समय पर नहीं मिल पाती है।ऐसे में समय पर आपूर्ति होना समस्या को बढ़ा देती है।
यह रही जिले में यूरिया की माहवार मांग
माह मांग
सितम्बर 200
अक्टूबर 500
नवम्बर 500
दिसम्बर 300
जनवरी 200
कुल 17000
(आंकड़े कृषि विभाग के अनुसार द्गमीट्रिक टन में)
हो रही आपूर्ति, काफी कम है समस्या
जिले में सहकारी समितियों में गत दिनों से मांग के आधार पर यूरिया की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में यहां समस्या काफी कम है। जहां से भी मांग हमारे पास आती है। उस अनुसार यूरिया की आपूर्ति कराई जा रही है। हाल ही में हमनें जिले में 8 सौ टन की आपूर्ति की है। जिससे काफी राहत मिली है।फिर भी जहां से मांग आएगी, उस अनुसार आपूर्ति का प्रयास किया जाएगा।
धनपाल निनामा
निरीक्षक एवं कार्यकारी मुख्य प्रबंधक
क्रय-विक्रय सहकारी समिति, प्रतापगढ़





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