लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
घूंघट की ओट में आदिवासी महिलाएं बढ़े उत्साह से मतदान बूथ की ओर आपस में बतियाते हुए बढ़ रही थी। तभी सडक़ किनारे खड़ी वृद्धा से बोली- चालो वोट दे आवा। वृद्धा ने कहा वोट तो मुं दे आई, पण थांई ध्यान राखीन वोट दीजो। वोट गलत नी वेणो चावे। तभी घूंघट उठा बोली- आपणे अणा मोटा नेताऊ काईज काम नी पड़े, पण वोट देणो, तो आपणो धरम है। बूथ के द्वार पर पुलिस कमांडो देख महिलाएं अचरज में बोली- ये पुलिस वाळा क्युं खड़े हैं, कांई लफड़ो तो नी वीयो। तभी स्काउट वॉलियंटर बोली- ये तो सुरक्षा में है, कांई लफड़ो नी वेई जा, जण्यु खड़ा है। आप तो चालता रेवो। उनके पीछे पीछे मैं भी आगे बढ़ चला तो दाएं व बाएं भाग के दोनों बूथों पर बीस से तीस तीस महिला- पुरुष कतार में लगे हुए थे। कतार में खड़ी अधिकतर महिलाएं घूंघट की ओट थी, मगर पुरुषों की अपेक्षा में उनकी कतार काफी लंबी थी।
कुछ ऐसा ही माहौल शुक्रवार सुबह 11.25 बजे थोरिया में राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत उमावि के अंदर व बाहर देखने को मिला। कतार का फोटो खींचने लगे, तो कुछ महिलाएं घूंघट में होते हुए भी मुंह मोड़ दिया, तो नवविवाहित महिलाएं बोली- ये तो मीडिया वाळा है। थाणो फोटु टीवी, अखबार में आएगा। इस पर कई महिलाएं पहचान पत्र दिखाते हुए सावधान की स्थिति में फोटो खिंचवाने के लिए खड़ी हो गई। तभी उनसे सवाल किया- आप वोट क्यों दे रहे हो, कुछ बोली- वोट देणो पड़े, तो कुछ बोली- यो तो म्हाणो धरम है। पुरुष की कतार छोटी होने के कारण में बताया कि वे अल सुबह ही वोट देकर नौकरी पर चले गए और अब गांव की महिलाएं वोट देने आई है। दाएं भाग पर 1019 में से 156 वोट पड़े, जबकि दूसरे बूथ पर 712 में से 142 वोट पड़े चुके थे।
मजेरा में पसरा रहा सन्नाटा
मजेरा विद्यालय के दोनों बूथ पर सुबह 11.46 बजे द्वार पर पुलिस मोबाइल युनिट की जीप खड़ी थी। बूथ के बाहर बीएलओ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व स्काउट वॉलियंटर व्हील चेयर के साथ खड़े थे, मगर न तो बूथ पर मतदाताओं की कतार थी और न ही आवाजाही की कोई रौनक। एक बूथ पर 746 में से 245 वोट पड़े, जबकि दूसरे बूथ पर 739 में से 209 वोट पड़े। मतदान दल के कार्मिक सुस्ताते दिखाई दिए। बाहर पूर्णतया सन्नाटा पसरा रहा।
आदर्श बूथ पर धूल में बैठे रहे वोटर
कुंभलगढ़ विधानसभा के आदर्श बूथ राउमावि रिछेड़ बायां भागा पर 1.17 बजे चालीस से पचास महिला- पुरुष कतार में खड़े थे, जिनमें धक्कामुक्की के हालात बने हुए थे। कुछ ग्रामीण कतार के पीछे धूल में ही बैठ अपनी बारी के इंतजार में खड़े थे, जबकि आदर्श प्रबंध के लिए ग्राम पंचायत द्वारा मतदाताओं के बैठने के लिए विशेष कुर्सियां लगवाई और छाया के लिए टेंट भी खींच रखा था, मगर वहां सिर्फ दो महिलाएं ही बैठी हुई थी। महिला वोटर के आधा दर्जन नन्हें बच्चों के लिए पालने, बिस्कीट, पानी व खेलने के लिए खिलौनों का भी प्रबंध किया। छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा खेला रही थी, जबकि महिलाएं वोट देने के लिए कतार में खड़ी हो गई। इस बूथ पर खड़ी महिलाओं में वोट देने को लेकर उत्साह था, मगर वोट कैसे दें, इस तकनीक को लेकर बड़ी ही उलझन में दिखी। बूथ से बाहर निकले, तो कुछ महिलाएं बतियातें मिली कि हमें पता ही नहीं चल पाया कि वोट कैसे डालें।





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