जयपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों में कचरा उठाने वाली कम्पनी रोडा बना सकती है। मंगलवार को कम्पनी के कर्मचारियों ने शहर के बडे हिस्से से कचरा उठाना बंद कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि अब भी पिछले माह की सैलरी का भुगतान नहीं हुआ है। वहीं कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि 80 करोड रुपए से अधिक बकाया कम्पनी का निगम पर चल रहा है। ऐसी स्थिति में काम करना संभव नहीं हो पा रहा है।
वहीं जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत हो रही है। ऐसी स्थिति में यदि कम्पनी का सहयोग नहीं मिला तो निगम के लिए सर्वेक्षण में रैंकिंग में सुधार कर पाना आसान नहीं होगा क्योंकि घर—घर से कचरा उठाने का काम निगम ने उक्त कम्पनी को ही दे रखा है।
कहीं एक दिन तो कहीं दो दिन बाद पहंुच रही गाडी
भुगतान न होने की वजह से कम्पनी ने भी कचरा उठाने में दिलचस्पी लेना कम कर दिया है। यही वजह है कि शहर के अधिकतर इलाकों में हूपर कहीं एक दिन तो कहीं दो दिन बाद पहुंच रहे हैं। सोसाइटियों में तो तीन से पांच दिन के बीच पहुंच रहे हैं।
क्या है विवाद
निगम का दावा है कि शहर से 1350 टन कचरा उठता है, वहीं कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि 1800 टन से अधिक कचरा प्रतिदिन उठा रहे हैं। ऐसे में कम्पनी का कहना है कि भुगतान 1800 टन का होना चाहिए जबकि निगम 1350 टन का भुगतान करता आ रहा है।





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