डाबला. क्षेत्र की ग्राम पंचायत रासला में स्थित प्राचीन शक्तिपीठ देगराय माता के मंदिर परिसर के जूनी जाल प्रांगण में चल रहे क्षत्रिय युवक संघ के सात दिवसीय आवासीय माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर के चौथे दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रात:कालीन ध्वज वंदना श्री क्षत्रिय युवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक देवीसिंह माडपुरा ने सामूहिक रूप से करवाई। इस दौरान संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक व रामगढ प्रांत प्रमुख पदमसिंह रामगढ़ के निर्देशन में सहयोगियों के सहयोग से विभिन्न खेलों का आयोजन किया जा रहा है। प्रात: कालीन अर्थ बौद्ध कार्यक्रम में क्षत्रिय युवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक रतनसिंह बडोड़ा गांव ने संघ संस्थापक तनसिंह द्वारा लिखित सहगीत व अर्थ बौद्ध विषयों पर सामूहिक चर्चा कार्यक्रम में ऐतिहासिक वीरों की वीररस की घटनाओं से अवगत करवाया। कार्यक्रम में सभी शिविरार्थियों के विचार वक्त करने के लिए खुले मंच से उपस्थित कई शिविरार्थियों ने विचार रखते हुए इतिहास से संबधित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संगठन में शक्ति है। स्वयं की पहचान करके अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने का प्रयास करें। शिविर मे भाग ले रहेे उगमसिंह लूणा ने संस्कृति व सभ्यता को विस्तार से समझाया। उन्होंने संस्कारित जीवन जीने की बात कही। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक तनसिंह के साहित्य को पढकऱ उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करने की जरूरत है। नरपतसिंह राजगढ़ के निर्देशन में जूनी जाल मंदिर के समक्ष सामूहिक हवन किया गया। उपस्थित शिविरार्थियों ने हवन में आहुतियां देकर विश्व शांति की प्रार्थना की। प्रशिक्षण शिविर के चौथे दिन दोपहर बाद बौद्धिक सत्र में संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक देवीसिंह माडपुरा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य स्वधर्म का पालन करना है। शक्ति का संचय किए बिना क्षात्र धर्म का पालन नहीं किया जा सकता, इसलिए शक्ति का उपार्जन अति आवश्यक है। क्षत्रिय युवक संघ का आधार भगवान कृष्ण की वाणी श्री मद्भगवद गीता है। कर्म, ज्ञान व भक्ति तीनों में से कर्म योग का मार्ग का समन्वय व संतुलन होना चाहिए। शिविर के दौरान संघ के अभयसिंह भोपा, चतुरसिंह भोपा, स्वरूपसिंह दवाड़ा सहित समाज के कई लोग व्यवस्था में सहयोग कर रहे है।





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