आकाश माथुर.भीलवाड़ा।
कमाऊ पूतों पर नजर रखने के लिए रोडवेज की हाईटेक प्रणाली पहले दौर ही हैंग हो गई है। इससे लोड फैक्टर पर ही असर नहीं पड़ रहा, बल्कि आगार की व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। इस कारण, परिचालकों को ऑनलाइन टिकट काटने के लिए दी इलेक्ट्रिॉनिक टिकटिंग मशीन (ईटीआइएम) है। अभी पचास फीसदी मशीन खराब पड़ी है। एक दशक पुरानी मशीनें बदले नहीं जाने से थक हार आगार प्रबंधन परिचालकों को फिर से पुराने ढर्रे पर ले आया है। दुबारा से हाथों से टिकट बनाकर यात्रियों को दिया जा रहा है। इससे आगार को परेशानी ही नहीं उठानी पड़ी रही बल्कि लोड फैक्टर पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
हाथ से क टता था टिकट
काफी समय पूर्व परिचालक वेबिल साथ लेकर हाथ से टिकट काटते थे। इससे समय अधिक लगता था और बिना टिकट यात्रा करा रोडवेज को नुकसान पहुंचाया जाता था। इससे बचने को हर परिचालक को मशीन थमाई गर्ई। उसके बाद कागज और पैन को छोड़कर ऑनरूट परिचालक मशीन से टिकट बनाने लग गए।
76 मशीनें नाकारा
भीलवाड़ा आगार आगार के पास इस समय 145 मशीन है। इनमें से 62 परिचालकों को दी हुई और 16 बुकिंगों पर रखी हुई है। 76 मशीन खराब पड़ी है। जिनमें अधिकांश कबाड़ में तब्दील हो गई है। इनको बदलने के लिए मुख्यालय को कोई बार पत्र लिखे गए। इसके बावजूद नई मशीन नहीं भेजी गई।
एक मिनट में 45, हाथ से बनाए तो 5 टिकट
मशीन से एक मिनट में परिचालक 45 टिकट काट सकता है। हाथ से टिकट बनाए तो एक मिनट में पांच टिकट ही बनते हैं। इससे समय और श्रम दोनों अधिक लग रहा है। मशीनें खराब होने से आगार की आय पर दस फीसदी का असर पड़ा है। वर्तमान में रोज भीलवाड़ा आगार को करीब साढ़े तेरह लाख रुपए की आय हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक मशीन नई दी जाती है तो एक से सवा लाख रुपए कमाई पर असर पड़ेगा।
यह पड़ रहा असर
मशीन खराब होने से लोड फैक्टर पर असर का बड़ा कारण बिना टिकट यात्रा है। इसके अलावा फ्लाइंग के डर से परिचालक रास्ते में छोटी दूरी पर जाने वाले यात्रियों को बैठाते ही नहीं है। इसका कारण समय पर टिकट नहीं बन पाने पर फ्लाइंग का डर उनको सताता है।
आगार में आधी मशीन खराब पड़ी है। इसे लेकर मुख्यालय को अवगत कराया है। नया टेंडर नहीं होने से मशीन सप्लाई नहीं हो पाई। मशीन खराब होने से लोड फैक्टर पर असर पड़ता है।
ओमप्रकाश चेचाणी, मुख्य प्रबंधक, भीलवाड़ा आगार





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