गंगापुरसिटी . आर्य समाज भगवती नगर के तत्वावधान में विजय पैलेस मैरिज होम में चल रहे सप्त दिवसीय यजुर्वेद परायण महायज्ञ के पांचवे दिन वेद उपदेश देते हुए आचार्य शिवकुमार शास्त्री ने तीर्थों का महत्व समझाते हुए कहा कि माता-पिता एवं विद्धान को ही सच्चे अर्थों में वेद कहा गया है।
उन्होंने बताया कि माता-पिता ही बच्चे का पालन-पोषण कर उसे भव सागर से पार कराते हैं। ईश्वर द्वारा निर्मित इन तीनों मूर्तियों की सेवा सत्कार को ही तीर्थ कहते हैं। शास्त्री ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल रोटी, कपड़ा एवं मकान ही नहीं होना चाहिए, बल्कि पूर्णानन्द की प्राप्ति होना चाहिए।
यज्ञ की ब्रह्मचार्या सरस्वती ने परमात्मा की भक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि परमात्मा की आज्ञा का पालन करना ही भक्ति है। भक्ति के तीन आयाम हैं। स्तुति, प्रार्थना एवं उपासना। परमात्मा के गुणों का गुणगान करना स्तुति एवं प्रभु के दिव्य गुणों का संकीर्तन करना उपासना कहलाता है। जिस प्रकार पानी के पास बैठने से शीतलता, अग्नि के पास बैठने से ताप की प्राप्ति होती है।
इसी प्रकार परमात्मा के निकट बैठने अर्थात संकीर्तन करने से मनुष्य में सद्गुणों का समावेश हो जाता है। प्रचार मंत्री ओमप्रकाश ऑफ सेट ने बताया कि श्रद्धालुओं ने गुरुकुल की सहायतार्थ राशि भेंट की। पाणिनी गुरुकुल बनारस की ब्रह्मचारणियों ने यजुर्वेद के मंत्रों का गायन किया। प्रथम पारी में दीपक कुमार, नरेन्द्र आर्य, सेवाराम बंसल, चन्द्रशेखर मंगलम, सन्तोष मसावता, मुकेश कुमार एवं द्वितीय पारी में गोविन्द खण्डेलवाल, दिनेशचन्द किशोरपुर, सुरेशचन्द डांस, राजेन्द्र बडेरा, तरुण खण्डेलवाल एवं दिनेशचन्द अध्यापक यजमान रहे।





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