कोटा . पूर्वी राजस्थान के मत्स्यांचल अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली और आगे सवाईमाधोपुर में कुल 30 और कोटा, झालावाड़, बारां व बूंदी में कुल 17 विधानसभा क्षेत्र हैं। 2013 की मोदी लहर में यहां भाजपा ने कुल 47 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी तो कांग्रेस नौ पर सिमट गई थी। इसी साल राज्यसभा का रास्ता चुनते हुए किरोड़ीलाल मीणा ने भाजपा में अपनी पार्टी राजपा का विलय कर दिया।
कोटा संभाग मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का क्षेत्र है। झालरापाटन से वह चुनाव लड़ रही हैं। पहले भी विजयी रही हैं। इस बार भाजपा से कांग्रेस में आए मानवेंद्र सिंह ने जरूर मुकाबले को रोचक बनाया है, लेकिन कद का असर वहां स्पष्ट है।
2013 में संभाग की 17 सीटों में से 16 पर भाजपा विजयी रही थी। सिर्फ हिंडौली क्षेत्र में प्रचंड मोदी लहर में भी अशोक चांदना कांग्रेस को जिता कर ले आए थे। 2018 इस मायने में अलग है। परिणाम भी 2013 जैसे तो नहीं ही रहेंगे। एक-दो को छोड़कर सभी जगह कड़ा मुकाबला है। एंटी इंकम्बेंसी का असर साफ दिख रहा है। पूर्वी राजस्थान में समीकरणों का बदलाव पिछली सरकार बनने के बाद वैर उपचुनाव में शुरू हुआ था। तब भाजपा से यह सीट कांग्रेस ने छीन ली थी। फिर बदलाव हुआ धौलपुर में और फिर अलवर लोकसभा उपचुनाव में, जिसका परिणाम यह हुआ कि अलवर में भाजपा ने 11 में से 10 चेहरे बदल दिए।
कोटा: इस बार चौंकाएंगे मतदाता
यहां कोटा उत्तर में इस बार जीत किसी की भी हो सकती है। लोग खुश नहीं हैं। फिर भीतरघात भाजपा को परेशानी में डाल सकती है। कोटा दक्षिण में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी युवा हैं। जातिगत समीकरण हावी हैं। लाडपुरा में सबसे रोचक मुकाबला है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल पूर्व राजपरिवार की कल्पना देवी और दो बार चुनाव हार चुके कांग्रेस के नईमुद्दीन गुड्डू की पत्नी गुलनाज के बीच मुकाबला है। पीपल्दा में दोनों ही पार्टी के तो रामगंज मंडी में भाजपा के पैराशूट उम्मीदवार हैं और तीनों कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सांगोद में दो बार के प्रतिद्वंदी फिर आमने-सामने हैं।
सीएम के 'घर में मानवेंद्र
मु ख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह के बीच जिले की झालरापाटन सीट पर मुकाबला है। जिस पर पूरे राज्य की नजर है। दोनों की परिवारों में पुरानी अदावत है और अब मुकाबला चुनावी मैदान में है। वसुंधरा राजे का यहां बडा जनाधार है। कांग्रेस ने मानवेन्द्र को उतार कर उन्हें घेरने की कोशिश की। यहां दोनों ही दल राजपूतों को साधने में लगे हैं। भाजपा की ओर से गृहमंत्री राजनाथ सिंह तो कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में लोकेन्द्र सिंह कालवी यहां राजपूत सम्मेलन में आ चुके हैं। खानपुर में भाजपा विधायक नरेन्द्र नागर के सामने कांग्रेस के सुरेश गुर्जर हैं। डग और मनोहर थाना में भाजपा ने नए चेहरे उतारे हैं। इन सीटों पर कांग्रेस ने पुराने प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया है। इससे दोनों ही सीटों पर तस्वीर साफ है।
भरतपुर: जातीय समीकरणों में फंसी हैं तीन सीटें
भरतपुर में मुकाबला इस बार एक जाति से तीन प्रत्याशियों के मैदान में होने से रोचक है। क्योंकि यहां 15 साल से विजय बंसल का कब्जा रहा है। डीग-कुम्हेर व नगर में भाजपा व कांग्रेस के अलावा बसपा भी दौड़ में है। बयाना में गुर्जर वोटों का ध्रुवीकरण ही निर्णायक रहेगा। वैर में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। कामां में सांप्रदायिकता से मतों के धु्रवीकरण का रास्ता ही निर्णय तय करता है।
स.माधो: गुर्जर-मीणा वोट निर्णायक
सवाईमाधोपुर में भाजपा की ओर से विधायक दीया कुमारी के टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। वहीं निर्दलीय और एवं बसपा भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। गंगापुरसिटी व बामनवास सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। खण्डार सीट पर भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। यहां मीणा एवं गुर्जर वोट निर्णायक की भूमिका निभाएंगे।
अलवर: भाजपा के लिए मुश्किल
थानागाजी में टक्कर चौतरफा है। बहरोड़-मुंडावर में भाजपा को कांग्रेस व गठबंधन प्रत्याशी से चुनौती मिल रही है। किशनगढ़-बास में कांग्रेस के बागी तो बानसूर में भाजपा के बागी चुनौती बन रहे हैं। अलवर शहर में वैश्य समाज भाजपा से नाराज है। ग्रामीण में कांग्रेस मजबूत है तो राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में त्रिकोणीय टक्कर है। रामगढ़ में चुनाव नहीं होगा।
धौलपुर: बीहड़ों में राह कठिन
धौलपुर में 4 विधानसभा सीट भाजपा के लिए मुश्किल बनी हुई है। क्षेत्र में सबसे चर्चित सीट राजाखेड़ा पर कांग्रेस आश्वस्त नजर आ रही है। वहीं धौलपुर में भाजपा की विधायक शोभारानी के सामने उनके जीजा कुश्वाह कांग्रेस से खड़े हैं। बाड़ी में जातिगत बाहुल्य के आधार पर बसपा के कुश्वाह ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
बूंदी: एक सीट पर तिहरा मुकाबला
केशवरायपाटन सीट पर कांग्रेस के बागी सीएल प्रेमी टिकट काट देने को भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं बूंदी में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है। हिण्डोली सीट पर दोनों ही दलों ने युवाओं को मौका दिया है। मजेदार बात यह कि पूरी ग्रामीण सीट पर सोशल मीडिया भी प्रचार का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।
बारां: किसान बदल सकते हैं समीकरणअन्नपूर्णा जिला बारां में कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी के सामने किसानों की परेशानी समस्या पैदा कर सकती हैं, वहीं भाया भी कदम फूंक फूंक कर रख रहे हैं। अटरू व किशनगंज सीट पर मुद्दों की कम और जातियों की चर्चा अधिक है। छबड़ा में भाजपा के सिंघवी गत चुनाव में भारी अंतर से जीते थे। यहां देखना यह है कि कांग्रेस ने पूर्व विधायक करण सिंह का संघर्ष कितना रंग लाएगा।
करौली: मुकाबला तिहरा भी-सीधा भी
करौली की सामान्य सीट पर मुकाबला होने त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां निर्दलीय व रालोपा भी मुकाबले में हैं। हिंडौन की आरक्षित सीट पर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। अनुसूचित जनजाति की सपोटरा सीट पर यूं तो कांग्रेस के रमेश मीणा तथा गोलमा के बीच सीधी टक्कर में हैें। टोडाभीम में बसपा व भावापा दोनों प्रमुख दलों के लिए मुसीबत हैं।





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