कोटा। मुख्यमंत्री के गृह संभाग और भाजपा के गढ़ कोटा संभाग की सत्रह विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में सोलह सीटों पर कमल खिला था। हाडोती के मतदाताओं ने दिल खोल कर वसुंधरा राजे को समर्थन दिया था। लोगों का यह समर्थन उनकी अपेक्षाओं के साथ था। पिछली विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो गया है और अब राजे और भाजपा के लिए परीक्षा की घड़ी है। वे लोगों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर सके, इसके नतीजों के दिन आने वाले हैं। वैसे राज्य का सबसे बडा दल बदल भी हाडौती में ही हुआ। उसके बाद बगावत के शोले भी खूब बरसे,लेकिन फिलहाल इन सबसे शांति है।
हाडौती का मिजाज राजस्थान के दूसरे हिस्सों से थोड़ा अलग सा है। हाडौती के तीन जिले कोटा, बारां और झालावाड़ की सीमाएं मध्यप्रदेश से मिलती हैं। इसलिए मध्यप्रदेश का काफी असर भी है। यहां के लोगों के शादी -संबंध भी मध्यप्रदेश के मालवा और शिवपुरी-ग्वालियर में काफी हैं। रोजगार के लिए भी आना जाना होता है। सामाजिक ताना बाना इतनी मजबूती से जुडा होने के बावजूद पडौसी राज्य का राजनीतिक असर यहां नहीं दिखता। हाडौती के लोग भी मालवा की तरह ही सरल हैं। सामान्यत: कहा जाता है कि जो उनके मन में होता है वहीं उनकी जबान पर भी होता है। जो भी...जैसा भी होता है वह सामने ही होता है। दबा छुपा कुछ नहीं।
कोटा जिला
कोटा जिले की सभी छह सीटें फिलहाल भाजपा के खाते हैं। यहां कोटा दक्षिण में हुए उपचुनाव में भी लोगों ने भाजपा का ही साथ दिया था। दो सीटें ऐसी हैं, जिन पर राज्य भर की चर्चा है। कोटा उत्तर जहां पूर्व मंत्री शांति धारीवाल मैदान में हैं, वहां माहौल बता रहा है कि प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी हुई है। सांगोद में पूर्व मंत्री भरत सिंह मैदान में हैं। उनके सामने हीरालाल नागर है। मजेदार फैसला पीपल्दा से भी आना है। जहां दोनों ही पैराशूट प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। भाजपा ने जहां महिला आयोग की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता शर्मा तो कांग्रेस ने राम नारायण मीणा को मैदान में उतारा है। दोनों नेताओं की राजनीति बूंदी में ही रही है। लाडपुरा में मुकाबला रोचक होने का दूसरा कारण है, वहां नेता नहीं बल्कि उनकी पत्नियों के बीच टक्कर है। कोटा का पूर्व राज परिवार अब भाजपा का हो गया है और इस परिवार की सदस्य कल्पना देवी के मुकाबले में यहीं से दो बार भाग्य आजमा चुके नईमुद्दीन गुड्डू की पत्नी गुलनाज बानो है।
बूंदी जिला
बूंदी में केशवरायपाटन में कांग्रेस ने अपना टिकट बदल कर मुकाबले को त्रिकोणिय बना दिया है। यहां भाजपा ने रामगंजमंडी से विधायक चन्द्रकांता मेघवाल को टिकट दे कर भेजा है। उनके मुकाबले में पहले सीएल प्रेमी थे। कांग्रेस ने प्रेमी का टिकट छीन कर राकेश बोयत को दे दिया और अब प्रेमी भी मैदान में हैं और बोयत भी। बूंदी सीट पर हाडौती में कोटा दक्षिण के बाद सर्वाधिक ब्राह्मण मतदाता है। ऐसे में दोनों ही पार्टियों ने ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारे हैं। अभी हिण्डोली कांग्रेस के पास है। इस सीट पर हमेशा से जातिगत समीकरण देख कर ही प्रत्याशी उतारे जाते रहे हैं।
बारां : अंता पर सबकी नजर, बारां पैराशूट में उलझी
धान का कटौरा कहे जाने वाले बारां जिले में चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं, लेकिन इस बार अंता सीट पर सबकी नजर टिकी हुई है। हर चुनाव में सीट बदलने वाले मौजूदा सरकार में कृषि मंत्री प्रभूलाल सैनी और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद जैन भाया के बीच सीधा मुकाबला है। मोदी लहर में भी सैनी ३३९९ वोटों से जीते थे, इस बार न लहर और न कोई बड़ा मुद्दा है। सैनी जातीय समीकरण को भुनाने में लगे हुए है तो भाया ने जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत कर रखी है। बारां-अटरू सीट पर भाजपा ने मंत्री बाबूलाल वर्मा को केशवरायपाटन के विधायक को पैराशूट कर उतारा है। वर्मा पर बाहरी का ठप्पा लग गया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक व जिलाध्यक्ष पानाचंद मेघवाल कड़ी चुनौती दे रहे है। छबड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व मंत्री और कई बार विधायक रहे प्रतापसिंह सिंघवी का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़ से है। पिछले चुनाव में राठौड़ का टिकट कट गया था। सहरिया बाहुल्य किशनगंज पर मौजूदा विधायक ललित मीणा और पूर्व विधायक निर्मला सहरिया के बीच कांटे की टक्कर है। कांग्रेस ने पिछली बार निर्मला सहरिया का पत्ता काटकर उसकी मां चतरी बाई को दिया था। यहां सहरिया मतदाता सबसे अधिक है। बारां जिला झालावाड़ और बारां सांसद दुष्यंत सिंह के संसदीय क्षेत्र में आते हैं।
झालावाड़: मुख्यमंत्री के सामने मानवेन्द्र सिंह
भाजपा के लिए इस जिले में सबसे अधिक प्रतिष्ठापूर्ण सीट झालरापाटन है। जहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने मारवाड के नेता मानेवन्द्र सिंह को कांग्रेस ने उता
रा है। कांग्रेस यहां मुख्यमंत्री को घेरना चाहती थी, वह इसमें कितना सफल हुई, यह आने वाला वक्त बताएगा।मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़े मनोहर थाना और डग में भाजपा ने अपने दोनों ही विधायकों के टिकट काट कर नए चेहरों पर दाव लगाया है। कांग्रेस ने पिछली बार के प्रत्याशी कैलाश मीणा को ही मैदान में उतारा है। डग में भी पुराने प्रत्याशी मदन लाल वर्मा मैदान में है। कांग्रेस ने झालरापाटन और खानपुर में नए चेहरे उतारे हैं। भाजपा यहां मुख्यमंत्री के कराए विकास के मुद्दे की सबसे अधिक चर्चा भी इसी जिले म ें कर रही है।





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