जैसलमेर. भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र जैसलमेर में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे के मुकाबले के हालात बन गए हैं। कांग्रेस ने पिछली बार पराजित उम्मीदवार पर ही इस बार भी दांव लगाया है तो भाजपा ने ‘एंटी इन्कमबेंसी’ के असर को कम करने के लिए चेहरा बदल दिया। राजपूत बाहुल्य वाली इस सामान्य सीट पर कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के रूपाराम मेघवाल को लगातार दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर पारम्परिक वोटों पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर भाजपा ने मजबूत प्रत्याषी के तौर पर पूर्व विधायक सांगसिंह भाटी को मैदान में उतारकर अपने प्रतिबद्ध मतदाताओं का बिखराव रोकने की कोशिश की है।
कांग्रेस में टिकट को लेकर रूपाराम और सुनीता भाटी में कड़ा मुकाबला था। जिसमें रूपाराम विजयी रहे।सुनीता भाटी को लगातार दूसरी बार टिकट से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने नाराजगी का इजहार भी किया। वे वर्तमान में भी कांग्रेस के चुनाव अभियान में कहीं नजर नहीं आ रही।गत दिनों प्रदेश कांग्रेस की ओर से निष्कासित 28 नेताओं की फेहरिस्त में उनका नाम आने से पार्टी में विग्रह सतह पर आ गया था, लेकिन अगले ही दिन प्रदेश कांग्रेस ने इसे ‘मानवीय भूल’ बताते हुए उनका निष्कासन नहीं होने की बात कहकर मामले को शांत किया। इधर,भाजपा ने बारानी भूमि आबंटन की मांग को प्रमुखता से उठाने वाले सांगसिंह भाटी को वर्तमान विधायक छोटूसिंह भाटी पर तरजीह दी। सांगसिंह 2003 में जैसलमेर से विधायक निर्वाचित हुएथे। इसके बाद 2008 के चुनाव में उनकी टिकट काट कर छोटूसिंह को दे दी गई। 2013 के चुनाव में भी उन्हें मौका नहीं मिला।ऐसे में दस साल बाद वे फिर से चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने उतरे हैं।
कांग्रेस अल्पसंख्यकों और अजा-जजा के परम्परागत वोटों को सहेजने के साथ जीत का लक्ष्य हासिल करने के लिए शहरी क्षेत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग और राजपूतों में सेंध मारना चाहती है। उधर, भाजपा को राजपूत, शहरी तथा प्रतिबद्ध मतदाताओं का सहारा है। वह अल्पसंख्यकों के मतों पर भी नजरें गड़ाए हुए है। जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में राजपूत, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति-जनजाति के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग के मत जीत-हार की गणित तय करते हैं।अधिकांश मतदाता गांवों में निवास करते हैं। जहां दोनों दलों की ताकत लगभग समान मानी जा रही है। ऐसे में इस बार जैसलमेर शहरी क्षेत्र के करीब 32 हजार 300 मत बहुत महत्वपूर्ण हो चले हैं। दोनों प्रत्याशी इसे भली प्रकार समझते हैं, इसलिए प्रचार के पहले दिन से उनके पारिवारिक सदस्य, कार्यकर्ता और समर्थक शहरी क्ष् ोत्र में घर-घर दस्तक देने में कसर नहीं छोड़ रहे। वे खुद भी दिनभर गांवों में बिताने के बाद रात के समय शहरी क्षेत्र में सम्पर्क करने पहुंच रहे हैं।
जैसलमेर निवासी श्यामसिंह उदावत कहते हैं, यहां साफ-सफाई बड़ा मसला है। व्यवसायी देवकिषन भूतड़ा जैसलमेर का पर्यटन महत्व होने के बावजूद उस स्तर की व्यवस्थाएं नहीं होने से निराष हैं। गृहिणी श्यामा देवी बताती है कि सडक़ों पर पशुओं का जमघट और अनियमित पेयजल आपूर्ति व्यवस्था रोजमर्रा की समस्या है। छीपासरिया गांव के पशुपालक रेशमाराम मेघवाल अकाल और सूखा के कारण पशुधन के लिए चारे-पानी के संकट से त्रस्त हैं। राघवा के भूरसिंह सोलंकी अकाल राहत कार्य समय पर नहीं करवाए जाने पर आहत हैं।
दोनों प्रत्याशियों का हाल
रूपाराम, कांग्रेस
ताकत:पिछला चुनाव कम अंतर से हारने के बाद क्ष् ोत्र में लगातार सक्रिय।कांग्रेस का विशाल वोट बैंक और भाजपा के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी से लाभ की उम्मीद।कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज।
कमजोरी:सार्वजनिक तौर पर की गई टिप्पणियों के कारण सोशल मीडिया पर निशाने पर रहते हैं। कांग्रेस की आंतरिक फूट से नुकसान का खतरा बना हुआ है।चुनिंदा लोगों से घिरे रहने का आरोप।
सांगसिंह, भाजपा
ताकत:बारानी भूमि आबंटन की घोषणा का श्रेय लेने में सफल रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिबद्ध समर्थकों की मौजूदगी और भाजपा का कटिबद्ध काडर चुनाव अभियान में मददगार साबित हो सकती है।
कमजोरी:पिछले कार्यकाल से जुड़े प्रकरणों से कईलोग आज भी नाराज हैं। शहरी क्षेत्र में पकड़ कमजोर मानी जाती है। भितरघात की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।





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