डिजिटल इंडिया का दावा
223 बूथों पर नहीं नेटवर्क, संपर्क भी होगा मुश्किल!
गिराब व बिजराड़ क्षेत्र में लगेंगे स्थायी वायरलैस सेट, सीमा क्षेत्र के कई गांवों में टावर लगाने पर है पाबंदी
बाड़मेर . सरकार डिजिटल इंडिया के लिए नित नई हाईटैक प्रणाली अपना रही है जबकि जिले में 223 मतदान केन्द्र ऐसे हैं जहां पर संपर्क करने के लिए फिलहाल मोबाइल नेटवर्क नहीं है। ऐसे में इन बूथों पर चुनावी गतिविधि का तत्काल अपडेट लेना मुश्किल होगा।
बाड़मेर जिले के गिराब, बिजराड़, गडरारोड व बाखासर थाना क्षेत्रों के करीब डेढ़ सौ मतदान केन्द्रों पर नेटवर्क नहीं है। यह क्षेत्र भारत-पाक सीमा से जुड़े हैं। इसलिए यहां मोबाइल नेटवर्क को लेकर कोई स्थायी प्रबंध नहीं है। चुनाव के दौरान इन गांवों व ढाणियों में कोई घटना व आपराधिक वारदात हो जाती है तो इसकी सूचना समय पर पुलिस तक कैसे पहुंचेगी? इतना ही नहीं 40-45 बूथ ऐसे हैं, जहां पुलिस का वायरलैस हैंडसेट भी फेल साबित होता है।
इन थानों में नहीं बेसिक फोन
जिले के बिजराड़, सेड़वा, गिराब और बाखासर पुलिस थानों में बेसिक फोन तक की सुविधा नहीं है। जिसके चलते यहां पहले से ही पुलिस अधिकारी परेशानी झेल रहे हैं। यहां नेटवर्क के अभाव में कोई आपराधिक घटना होने के बाद ग्रामीण पुलिस से तत्काल संपर्क नहीं कर पाते हैं। यहां घटना के बाद ग्रामीण कई किलोमीटर का सफर कर थाने पहुंच पाते हैं।
पुलिस लगाएगी वायरलैस सिस्टम
गिराब-बिजराड़ थाना क्षेत्र के मतदान केंद्रों के लिए स्थायी वायरलैस सेट लगाए जाएंगे। पुलिस सुंदरा, बंधड़ा, हुरो का तला, खारिया कल्याणपुर सहित कई गांवों में स्थायी वायरलैस सिस्टम लगाकर नेटवर्क की समस्या वाले वालों बूथों से संपर्क रखेगी। साथ ही अन्य बूथों पर बाइकर्स रहेंगे। जो घटना होने की स्थिति में नेटवर्क वाले एरिया में पहुंचकर संबंधित को तुरंत जानकारी देंगे।
सीमा क्षेत्र में नेटवर्क समस्या
ज्यादातर गांव रेतीले धोरों के बीच बसे हुए हैं। यह क्षेत्र भारत-पाक पर होने से यहां मोबाइल टावर लगाने पर पाबंदी लगी हुई है, इसलिए किसी भी कंपनी के टावर नहीं लगे हैं। मुनाबाव स्टेशन के बाद सुंदरा गांव तक कोई नेटवर्क नहीं है। इनके बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर है।





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