तमाम तकलीफों के बावजूद फक्र है हिन्दुस्तान में होने का
पश्चिमी सीमा के आखिरी गांव अकली से (बाड़मेर) . बाड़मेर जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के आखिरी गांव अकली में खड़ा हूं। सामने पाकिस्तान का खोखरापार रेलवे स्टेशन नजर आ रहा है तो एक तरफ भारत का अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन मुनाबाव है। पाकिस्तान की सीमा से महज 500 मीटर दूर इस पोलिंग स्टेशन पर सुबह 9 बजे तक 45 वोट डाले जा चुके थे और कई लोग कतार में थे। यहां कुल 526 मतदाता हैं। महिलाओं की कतार है जो घूंघट में यहां वोट देने आई हैं। वोट के महत्व के बारे में इतना जानती है कि 'एमएलए बणसेÓ (एमएलए बनेगा)। फिर हंसते हुए कहती हैं कि हर बार यही कहा जाता है कि एमएलए बनने के बाद काम होगा लेकिन हमने तो यहां कोई काम होते नहीं देखा है।
महिलाओं का कहना है कि यहां एक नर्स (एएनएम) की नियुक्त हो जाए तो ही खूब है। गांव के पूर्व सरपंच कंवराजङ्क्षसह बताते हैं कि तकलीफों की तो कोई कमी नहीं है। यहां आठवीं तक के स्कूल में 175 विद्यार्थी हैं पर दो ही शिक्षक हैं। वे पानी की पीड़ा को सबसे बड़ा मानते हैं। डेढ़ साल से पाइप लाइन के जरिए पानी नहीं पहुंचा है। ट्यूबवैल खारा निकला। अब बेरियों से पानी लाते हैं। रातभर इन बेरियों पर पहरा देते हैं ताकि सुबह पानी मिल जाए और सक्षम लोग 500 रुपए में टैंकर मंगवाते हैं। कंवराज का सवाल है कि बीएडीपी सहित बॉर्डर विकास की योजनाओं का रुपया आखिर कहां गया।
गांव के ही युवा वीरेन्द्रसिंह कहते हैं कि यह सीमा का आखिरी गांव है। मुनाबाव रेलवे स्टेशन पास में है। यहां तो तमाम सुविधाएं देनी चाहिएं ताकि लोग भी इसे देखकर कहें कि भारत के आखिरी गांव तक सुविधाएं हैं।
फक्र है हमें
ग्रामीण बताते हैं कि करीब 300 साल पहले यह गांव बसा था। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन हुआ तो अकली को भारत में रखा गया। हमारी जमीनें भी पाकिस्तान में रही हैं लेकिन हमें फक्र है कि हम भारत में हैं। लोकतंत्र का यह पर्व आता है तो लगता है कि यहां तमाम तकलीफों के बावजूद सुकून है।
धोरों पर गांव, एक किमी दूर मतदान केंद्र
मुनाबाव से 15 किमी दूर सरहद के दुर्गम इलाके में रोहीड़ी गांव टीले पर बसा है और एक किमी दूर मतदान केन्द्र, जहां मतदाताओं का आना-जाना शुरू था। उनसे वोट देने व विकास को लेकर सवाल किया तो बोले- वोट के बाद काम होगा या नहीं, लेकिन लोकतंत्र के महापर्व में वोट तो जरूर दे आए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नेटवर्क की समस्या है, साथ ही पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मुनाबाव गांव, पिथागर सहित कई गांवो में लोग मतदान को लेकर उत्साहित नजर आए।





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