आबूरोड. घुमंतु समुदायों के बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिएआईआईएफएल फाउंडेशन ने हाथ आगे बढ़ाया है। जिन घुमंतु परिवारों के बच्चे कभी एक गांव तो कभी दूसरे गांव में रहकर बड़े होते हैं,इन बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए फाउंडेशन ने एक चल शिक्षण संस्था के रूप में रथ शाला की शुरुआत की है। योजना की जानकारी देते हुए आईआईएफएल फाउंडेशन की निदेशक मधु जैन ने बताया कि घुमंतु समुदाय अपने पशु लेकर पलायन कर जाते हैं, इन समुदाय के बच्चे हमेशा स्कूलों से दूर ही रहते हैं। इन बच्चों को स्कूलों से जोडऩे के लिएअब तक जमीनी धरातल पर प्रयास नहीं हो सके। इसी के मद्देनजर फाउंडेशन ने रथशाला की शुरुआत की है। आबूरोड से ये रथ शाला पंद्रह-बीस बच्चों के परिवार के साथ बच्चों व विशेष रूप से बालिकाओं को शिक्षित करने पर कार्य करेगी। इसके साथ ही घुमंतु समुदाय के ही एक शिक्षक या शिक्षिका को भेजा जाएगा। जो चार से चौदह वर्ष तक के बच्चों को पढ़ाएगा। रथ शाला में लेखन व पाठ्य सामग्री होगी। साथ ही शाम को अध्ययन के लिएरोशनी व्यवस्था के लिएसोलर चलित लाइटे लगाई गई है। रथशाला में रेबारी समुदाय की बालिकाएं शिक्षा से लाभान्वित होगी। रथशाला को प्रदेश भर में संचालित किया जाएगा।
हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
आकराभट्टा स्थित जन चेतना संस्थान में फाउंडेशन के सहयोग से रथशाला को रवानगी दी गई। फाउंडेशन निदेशक मधु जैन, बीईओ दलपत राजपुरोहित, जन चेतना संस्थान निदेशक ऋचा औदिच्य, गणका सरपंच ललिता गरासिया ने हरी झंडी दिखाकर रथ शाला को रवानगी दी। इससे पूर्व हुईसभा में जन चेतना संस्थान निदेशक ने सखियों की बाड़ी योजना की जानकारी दी। बीईओ पुरोहित ने इस पहल की सराहना करते हुए शिक्षा विभाग से सहयोग प्रदान करने की बात कही। संस्थान की चंद्रकांता, सतीश, रणछोड़ देवासी, अलका सिसोदिया, शिव, नवली, कैलाश, पुष्पा आदि मौजूदथे।





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