आबूरोड. शहर समेत जिलेभर में मौसम के बदलाव के साथ रबी की सीजन में फसलों को यूरिया की आवश्यकता होती है, हालांकि आबूरोड क्रय विक्रय सहकारी समिति में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है, लेकिन किसान उसे खरीदने तैयार नहीं है। मोटे दाने की इस यूरिया को खरीदने में किसानो की रुचि नहीं है। यहां से विभाग के माध्यम से करीब १५०० टन की डिमांड भेजने पर मात्र २१ टन ही यूरिया आया मिला था। ऐसे में किसानों को निजी दुकान तथा गुजरात पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
डिमाडं १५०० की आया २१ टन
आबूरोड एवं रेवदर तहसील क्षेत्र के समितियों के लिए इस सीजन में १९ नवम्बर को करीब १५०० मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड भेजी थी, लेकिन मिला केवल 2१ टन। ऐसे में अक्टूबर माह का पड़ा यूरिया ही किसानों को वितरण किया जा रहा है। वैसे आबूरोड व रेवदर के ग्रामीण समितियों में खाद नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसान निजी दुकानों ज्यादा दाम चुकाने तथा यूरिया के साथ अन्य अनचाही चीजें खरीदने को भी मजबूर है। आबूरोड का रेक पॉइंट जालौर दिया गया है, ऐसे में यहां पर नियत समय पर रेक नहीं लगने के कारण खाद नहीं आया है।
मोटा यूरिया भी लाभदायक
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मोटा यूरिया पतले की अपेक्षा अधिक लाभदायक है। यह पौधों के जड़ तक पहुंचता है। जबकि पतला यूरिया बड़ी मात्रा में पत्तियों और तनो से चिपक कर रह जाता है। जरूरत पडऩे पर यदि खाद को रखना भी पड़े तो इसमें नमी नहीं आती है। जबकि पतला यूरिया जल्दी नमी सोखकर खराब हो जाता है। मोटा यूरिया धीरे-धीरे घुलता है।
किसानों को चाहिए बारीक दाने
आबूरोड समिति मेंं यूरिया उपलब्ध होना बता रहे हैंए लेकिन ज्यादातर किसान इस यूरिया को खरीदने में रुचि नहीं ले रहे। बताया जा रहा है कि यह यूरिया बड़े दाने वाला हैए जिसे किसान पसंद नहीं करते। ऐसे में बारीक दानों वाला यूरिया निजी दुकानों से ही खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में छोटे दाने नहीं मिलने के कारण फसल में नुकसान की चिंता बढ़ रही है। शहर समेत आस-पास में खेतों में इन दिनों गेहूं, जीरा, इसबगोल, सरसो, सौंफ की फसल खड़ी है। कई हैैक्टेयर में खड़ी इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया देना आवश्यक होता है।
इनका कहना...
हमारे यहां से इफ्को तथा कृभ्कों के अधिकारियों से यूरिया की डिमांड की है, उन्होंने बताया कि है इस माह के अंत तक रेक लगने की संभावना है। यहां छोटे दाने की ज्यादा मांग है, ऐसे में बड़ा दाना आने पर उसकी कम बिक्री होगी।
- महेन्द्र कुमार शर्मा,मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रय विक्रस सहकारी समिति आबूरोड।





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