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VIDEO: मासूम से दुष्कर्म के अपराधी को उम्रकैद

- पोक्सो कोर्ट खुलने के बाद पहला निर्णय सुनाया
प्रतापगढ़ विशिष्ठ न्यायालय (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण) के विशिष्ठ न्यायाधीश परमवीरसिंह चौहान ने मासूम से दुष्कर्म के मामले में बुधवार को एक अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर दो लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। प्रतापगढ़ में पोक्सो कोर्ट खुलने के बाद यह इसका पहला अदालती फैसला है।
लोक अभियोजक तरूणदास वैरागी ने बताया कि घंटाली थाने में एक व्यक्ति ने 12 सितम्बर 2017 को एक रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया था कि 11 सितम्बर को वह अपनी पत्नी के साथ खेत में काम कर रहे था। उनकी पांच वर्षीय पुत्री घर पर अकेली थी। तभी मोबाइल चार्ज करने के बहाने देवीलाल उर्फ देवला पुत्र उदा मीणा निवासी मउ थाना घण्टाली घर पर पहुंचा।
उसकी पांच वर्षीय पुत्री को अकेला पाकर दुष्कर्म किया। बालिका के चिल्लाने की आवाज सुनकर दम्पती घर पहुंचे। तब तक देवला वहां से भाग गया था।
इस पर पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान कर देवला को गिरफ्तार किया। अभियुक्त के विरूद्ध न्यायालय में चार्जशीट पेश की। न्यायालय ने देवला को दोषसिद्ध माना और उसे धारा 447 आईपीसी में तीन माह का कारावास व पांच सौ रुपए जुर्माना, धारा 376 में आजीवन कारावास व एक लाख रुपए का अर्थदण्ड तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5 (झ) (ड)/6 में आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किए जाने का आदेश सुनाया।

न्यायालय ने माना- हैवानियत की पराकाष्ठा, पाश्विक कृत्य
विशिष्ट लोक अभियोजक तरुणदास वैरागी ने बताया कि न्यायालय ने सजा के बिन्दु पर अभियुक्त को सुनने के बाद अपने निर्णय में टिप्पणी दी। जिसमें लिखा कि यह कृत्य इंसानियत को झकझोर कर मानवीय संवेदनाओं को संज्ञा शून्य कर देने वाला पाश्विक कृत्य है। हैवानियत की पराकाष्टा है। मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है। न्यायालय ने फैसले में टिप्पणी की कि ‘जहां सम्पूर्ण राष्ट्र बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के अभियान से जुड़ा है। वहां पहली कक्षा में पढऩे वाली अबोध बालिका के साथ हुए कृत्य को देखते हुए अभियुक्त किसी भी प्रकार की दया का पात्र नहीं रहा है। ऐसे अभियुक्त को सभी प्रकार की धाराओं में पूर्णतया दण्डित करने से समाज में सुरक्षा की भावना महसूस होगी।
एसपी के निर्देशन में लिया केस ऑफिसर स्कीम में
जिला पुलिस अधीक्षक शिवराज मीणा के निर्देशन पर इस प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लिया गया था। इसमें अनुसंधान अधिकारी महावीरसिंह, कांस्टेबल मनोहर सिंह, निर्मल कुमार और रूपलाल व महिला कांस्टेबल नीलम की टीम ने मात्र 19 दिन में आरोपी के विरूद्ध चालान पेश किया। थाना सालमगढ़ के सहयोग से अभियुक्त को 30 घण्टे में गिरफ्तार कर लिया। सरकार ने न्यायालय के आदेश से पीडि़ता को इलाज के लिए व सुरक्षा के लिये 2 लाख रुपए पूर्व में ही अदा कर दिए थे। कुल 14 माह में न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।



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