नई दिल्ली। मोदी सरकार ने आधार को लेकर निजता संबंधी चिंताओं की वजह से कानून में संशोधन की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई (UIDAI) को आय पर टैक्स छूट का भी प्रस्ताव दिया है। आधार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर सरकार ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। मौजूदा कानून के अनुसार अगर कोई भी कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है तो उसपर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगता है, लेकिन सरकार के ताजा प्रस्ताव के अनुसार कंपनियों पर प्रतिदिन 10 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत ऐसे बच्चे जिनके पास आधार हैं, उन्हें 18 साल की उम्र पूरी करने के छह महीने के अंदर 12 अंक की बायोमेट्रिक नंबर को रद्द कराने का विकल्प होगा।
इसलिए उठाया गया ये कदम
दरअसल सरकार यूआईडीएआई को अन्य नियामकों की तरह अधिक अधिकार देना चाहती है क्योंकि आधार कानून के तहत यूआईडीएआई के पास किसी उल्लंघन करने वाली इकाई के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई का अधिकार नहीं है। अनधिकृत तरीके से सेंट्रल आइडेंटिफिकेशन डेटा रिपॉजिटरी तक पहुंच तथा डेटा से छेड़छाड़ करने पर सजा की अवधि को मौजूदा के तीन साल से बढ़ाकर 10 साल करने का भी प्रस्ताव है। आधार कानून के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रस्ताव करते हुए प्रावधानों के मसौदे में कहा गया है कि इसमें एक नई धारा जोड़ी जाएगी। इसके तहत आधार पारिस्थितिकी तंत्र में कानून, नियम, नियमनों तथा निर्देशों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर जुर्माना लगाया जा सके।
आधार नहीं होने पर सब्सिडी से नहीं रहेंगे वंचित
प्रस्ताव में कहा गया है कि किसी बच्चे के आधार नामांकन के लिए माता-पिता या अभिभावक की मंजूरी जरूरी होगी। आधार नहीं होने पर किसी भी बच्चे को सब्सिडी, लाभ या अन्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा जा सकेगा। प्रस्तावित संशोधनों में 'वर्चुअल आईडी' और आधार के इस्तेमाल के स्वैच्छिक और ऑफलाइन तरीके का भी प्रावधान होगा। लोकसभा में बुधवार को आधार कानून, भारतीय टेलिग्राफ अधिनियम और धन शोधन रोधक कानून में संशोधन संबंधी विधेयक सूचीबद्ध है।
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