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कौन से नगर निगम के प्रत्येक कर्मचारी को स्वच्छता एप पर रोजाना 10 शिकायतें, सिटीजन फीडबैक अपलोड करने का टारगेट, जानिए

जयपुर। देशभर में 4 जनवरी से 31 जनवरी तक चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण—2019 में जयपुर को नम्बर वन बनाने के लिए नगर निगम ने नया तरीका निकाला है। निगम प्रशासन ने प्रत्येक कर्मचारी को टारगेट दिए हैं। निगम के सभी जोन कार्यालयों और मुुख्यालय के उपायुक्तों को स्वच्छता एप से जुड़ा लक्ष्य पूरा करने के लिए कहा गया है। नए आदेश के मुताबिक सभी जोन कार्यालयों और मुख्यालय में स्वच्छता एप और सिटीजन फीडबैक के लिए एक अधिकारी को कार्य प्रभारी नियुक्त किया गया है। कार्य प्रभारी निगम के प्रत्येक कर्मचारी से स्वच्छता एप पर 10 शिकायतें और 10 सिटीजन फीडबैक अपलोड करवाना सुनिश्चित करेगा। साथ ही कार्य प्रभारी रोजाना शाम 5 बजे तक स्वच्छता एप के टारगेट की रिपोर्ट बनाकर उपायुक्त स्वास्थ्य द्वितीय को भिजवाएगा।

नगर निगम आयुुक्त विजयपाल सिंह ने बताया कि स्वच्छता एप डाउनलोड करने, उस पर शिकायत अपलोड करने तथा सकारात्मक सिटीजन फीडबैक देने का प्रशिक्षण सभी जोन कार्यालय में विशेष शिविर लगाकर दिया गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वच्छता एप एवं सिटीजन फीडबैक 1250 अंक का है। इसे देखते हुए नगर निगम के प्रत्येक कर्मचारी को इसमें योगदान देने को कहा गया है। निगम कर्मचारियों को टारगेट देकर स्वच्छता एप के पूरे अंक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

एप डाउनलोडिंग में जयपुर तीसरे नम्बर पर
जानकारी के अनुसार जयपुर के लोगों ने एक लाख से ज्यादा एप डाउनलोड कर देशभर के टॉप 5 सिटीज में जगह बना ली है। चण्डीगढ़, दिल्ली और इंदौर के बाद जयपुर ही सबसे ज्यादा स्वच्छता एप डाउनलोड करने वाला शहर है। इसका जयपुर को स्वच्छता सर्वेक्षण में फायदा मिलेगा, लेकिन जयपुर के लोग एप डाउनलोड करने के बाद उसे उपयोग में नहीं ले रहे हैं। इसके कारण जयपुर एप से सिटीजन फीडबैक देने के मामले में पिछड़ रहा है। जबकि 5000 अंक वाले स्वच्छता सर्वेक्षण—2019 में सिटीजन फीडबैक के पेटे 1250 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसका मतलब ये है कि जिन शहरों का सिटीजन फीडबैक बेहतर होगा, उन्हें 1250 में से ज्यादा अंक मिलेंगे। जयपुर के लोगों ने एप डाउनलोड करके बढ़त हासिल तो कर ली है, यदि शहरवासी एप से शहर की सफाई व्यवस्था, टॉयलेट की स्थिति या निगम की किसी भी सुविधा के बारे में शिकायत नहीं करेंगे या फीडबैक नहीं देंगे तो एप डाउनलोड करने का एडवांटेज नहीं मिल पाएगा। इस स्थिति को देखते हुए ही निगम ने कर्मचारियों को टारगेट दिए हैं, ताकि लोगों को जागरूक कर स्वच्छता एप के पेटे ज्यादा से ज्यादा अंक मिल सके।



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