भीलवाड़ा।
वाणिज्यिक कर विभाग ने गुरुवार को एक फर्म पर कार्रवाई कर करोड़ों रुपए के बोगस बिलिंग के मामले का खुलासा किया। विभाग ने तीन कम्प्यूटर, तीन लेपटॉप व अन्य दस्तावेज को जब्त किए। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जीएसटी लागू होने के बाद यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। माना जा रहा है कि फर्म एक है, लेकिन उसके माध्यम से एक दर्जन से अधिक बोगस फर्मों के माध्यम से करोड़ों का व्यापार किया जा रहा था।
उपायुक्त (प्रशासन) रामलाल चौधरी ने बताया कि हीरा पन्ना मार्केट स्थित सीए की एक फर्म के दो कार्यालयों के माध्यम से करोड़ों रुपए के बोगस बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का खेल चल रहा था। एक टीम को विशेष रूप से जांच पर लगाया गया। पुष्टि होने पर एक दर्जन से अधिक अधिकारियों की टीम ने दो कार्यालयों पर कार्रवाई की। चौधरी ने बताया कि फर्म से तीन कम्प्यूटर, तीन लेपटॉप, 36 फाइलें, 12 फर्मों की चेक बुक, 17 फर्मों की छापें (सील) सहित अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इनकी विस्तार से जांच की जाएगी। टीम में मुख्य रूप से सहायक आयुक्त बीएम माहेश्वरी, बीएल कावरिया, कानाराम, आरएस कूम्पावत, राज्य कर अधिकारी शैलू छाजेड़, कैलाश राम, कुलभान सिंह, सुरेन्द्रसिंह चावड़ा, लतीफ खान व तकनीकी विशेषज्ञों सहित 15 सदस्य शामिल थे। चौधरी ने बताया कि राजसमन्द में भी मार्बल व्यवसायी के यहां जांच की जा रही है। यहां भी फर्जी बिलों के माध्यम से व्यापार किए जाने की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है।
इनके बनाते बोगस बिल
अधिकारियों का कहना है कि सीए कमीशन के चक्कर में बीड़ी, सिगरेट, तेल, स्क्रेप, कपड़ा, सीमेन्ट, धागा सहित कई प्रकार के उत्पाद के बोगस बिल बना रहा था।
इस तरह हो रहा था घोटाला
पूरा खेल कमीशन और क्रेडिट के बंटवारे का था। लगता है कि बोगस १५ कम्पनियों की रिंग तैयार की गई है। इसमें एक मुख्य कम्पनी है। सहायक कम्पनियों ने कागत पर ही माल मुख्य कम्पनी को बेचा। यह खेल लम्बे समय से चल रहा था।





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