जयपुर। प्रदेश में मुख्यमंत्री, नगरीय विकास मंत्री से लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण में आयुक्त तक बदल गए हैं, लेकिन नहीं बदला है तो जेडीए का काम करने का ढर्रा। मामला रिंग रोड से जुड़ा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने रिंग रोड के लिए जमीन अवाप्ति की पेटे जेडीए को 26 जून 2018 में 200 करोड़ रूपए दिए। जेडीए को एक महीने में इस राशि से आगरा रोड, टोंक रोड और अजमेर रोड पर प्रस्तावित क्लोअर लीफ स्ट्रक्चर्स बनाने के लिए जमीन खरीदनी थी, लेकिन पैसे मिलने के 7 महीने बाद भी जेडीए ने भूमि अवाप्ति प्रक्रिया तक शुरू नहीं की है। जेडीए की लेटलतीफी का खामियाजा रिंग रोड प्रोजेक्ट में देरी के रूप में जनता को भुगतना पड़ेगा।
एनएचएआइ से उधार लिए हैं 200 करोड़
जानकारी के अनुसार रिंग रोड प्रोजेक्ट के पेटे जेडीए को एनएचएआई से 35 करोड़ रूपए सालाना के हिसाब से 10 साल में 350 करोड़ रूपए मिलने हैं। जेडीए ने अप्रेल 2018 में इन्हीं 350 करोड़ रूपए में से 200 करोड़ रूपए एनएचएआई से उधार मांगे थे। एनएचएआई ने जेडीए का प्रस्ताव शहरी विकास मंत्रालय को भिजवाया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद सितम्बर में एनएचएआइ ने जेडीए को 200 करोड़ रूपए दे दिए। इस राशि से जेडीए को रिंग रोड परियोजना में प्रस्तावित क्लोअर लीफ स्ट्रक्चर के लिए जमीन खरीदनी है।
एमओयू के वक्त झूठ बोला था जेडीए
एनएचएआई ने अगस्त 2017 में जेडीए के साथ मेमोरेंडम आॅफ अंडरस्टेंडिंग साइन किया था। एमओयू के बाद जब एनएचएआई ने रिंग रोड के लिए टेंडर करना शुरू किया तो पता चला कि रिंग रोड को हाइवे कनेक्ट करने वाली तीन जगहों पर फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर बनने हैं, वहां पर अभी जमीन अवाप्त नहीं की गई। भूमि अवाप्ति नहीं होने के कारण एनएचएआई को बड़े स्ट्रक्चर्स के टेंडर रोकने पड़े। ऐसे एनएचएआई की संवेदक फर्म गावर फिलहाल तीनों बड़े स्ट्रक्चर्स के काम को छोड़कर बीच के हिस्से और दूसरे निर्माण कार्य कर रही है। लेकिन जेडीए ने अब तक तीनों में से एक भी जगह के लिए जमीन अवाप्त नहीं की।
क्लोवर लीफ स्ट्रक्चर्स की वजह से होगी देरी
जानकारी के अनुसार राजमार्गों के यातायात को बिना किसी ट्रेफिक सिग्नल पर रोके सीधे ही हाईवे पर लाने की तकनीक वाले निर्माण को फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर कहते हैं। जब दो बड़ी सड़कों के ट्रेफिक को बिना रोके एक से दूसरी रोड पर लाया जाता है, तो इसके लिए जो ढांचा बनता है, उसका डिजाइन फूल की पत्तियों की तरह का हो जाता है। इसलिए इन स्ट्रक्चर्स को फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर कहा जाता है। इस तकनीक में ट्रेफिक लाइट की बजाय ऐसी घूमावदार सड़क बनाई जाती है, जो किसी भी साइड के यातायात को रोके बिना एक रोड के ट्रेफिक को दूसरे में मर्ज कर देती है। एनएचएआई इंजीनियर्स के मुताबिक रिंग रोड के आगरा रोड स्थित स्टार्टिंग प्वाइंट बगराना में रिंग रोड के ट्रेफिक को हाईवे पर लाने और हाईवे के ट्रेफिक को रिंग रोड पर लाने के लिए फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर बनना है। ऐसे ही स्ट्रक्चर टोंक रोड पर शिवदासपुरा और अजमेर रोड पर मौजमाबाद—अखेपुरा के नजदीक बनने हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार—
एनएचएआइ ने जेडीए को जून 2018 में 200 करोड़ रूपए दिए थे। उस समय जेडीए ने एक महीने में जमीन आवाप्त करने की बात कही थी। लेकिन 7 महीने बाद भी जमीन अवाप्ति तो दूर इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है जेडीए ने। एनएचइआइ जेडीए से कई बार इस बारे में मांग कर चुका है। इन हालात में रिंग रोड प्रोजेक्ट में देरी होगी, इसकी जिम्मेदारी जेडीए की रहेगी।
अजय विश्नोई, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ
आंकड़ों की नजर में रिंग रोड
कुल लम्बाई — 47 किलोमीटर
रूट — आगरा रोड से अजमेर रोड तक वाया टोंक रोड
2011 में लागत — 890 करोड़
2017 में लागत — 1,825 करोड़
रोड की लागत —1,275 करोड़
जेडीए को मिलेंगे — 350 करोड़
सुप्रीम कंपनी को मिलेंगे — 200 करोड़
यूं रहा रिंग रोड का सफर
2005—06 में प्लानिंग व भूमि अवाप्ति
2011 में निर्माण के वर्क आॅर्डर जारी
सेनजॉस सुप्रीम टोलवेज प्रा लि को दिया ठेका
3 साल तक जमीन पर कब्जा नहीं मिला
सितम्बर 2014 में रिंग रोड का काम शुरू
दिसम्बर 2016 में रिंग रोड का काम बंद
2017 में ठेकेदार कंपनी को हटाया
अगस्त 2017 में एनएचएआई—जेडीए का एमओयू





No comments:
Post a Comment