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2000 के नोटों में आ रही है कमी, क्या जल्द ही बंद हो जाएंगे ये नोट भी?

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद साल 2016 में जारी किए गए 2000 रुपए को नोटों की छपाई अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। गुरूवार को वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। आरबीआई ने नोटबंदी के बाद जब 500 और 1000 रुपए को नोटों को चलन से बंद किया था तो उसके बाद उन्होंने 2000 रुपए के नोटों को चलन में लाया था जिनकी संख्या आज के समय में कम होती जा रही है।


जरूरत के हिसाब से बढ़ाते हैं छपाई

आपको बता दें कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि रिजर्व बैंक और सरकार नोटों की छपाई पर समय-समय पर फैसला लेते रहते हैं कि हमें कितने नोटों की छपाई करनी है और कितनी नहीं। यह फैसली चलन में जारी नोटों की जरूरत के हिसाब से लिया जाता है। आरबीआई ने 2000 रुपए के कम नोटों की छपाई से अभी तक पर्दा नहीं उठाया है।


आंकड़ों के अनुसान मिली जानकारी

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च, 2017 के अंत तक 328.5 करोड़ इकाई 2000 के नोट चलन में थे। 31 मार्च, 2018 के अंत तक इन नोटों की संख्या मामूली बढ़कर 336.3 करोड़ इकाई पर पहुंच गई। इसके साथ ही मार्च 2018 के अंत तक कुल 18,037 अरब रुपये की करेंसी चलन में थी, इनमें 2000 के नोटों का हिस्सा घटकर 37.3 फीसदी रह गया। मार्च, 2017 के अंत तक कुल करेंसी में 2000 के नोटों का हिस्सा 50.2 फीसदी पर था। इससे पहले नवंबर 2016 में 500, 1000 रुपये के जिन नोटों को बंद किया गया उनका कुल मुद्रा चलन में 86 प्रतिशत तक हिस्सा था।


नकदी की समस्या को कं करने के लिए चलन में आए थे नोट

नोटबंदी के बाद जब आरबीआई ने 2,000 का नोट जारी किया गया था तभी सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया था कि धीरे-धीरे इन नोटों की छपाई मो कमी की जाएगी और 2000 के नोट जब जारी किए गए थे तो उनका एकमात्र मकसद लोगों को नकदी उपलब्ध कराना था।

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