नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। दरअसल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध की आशंका और भी कई परेशानियों का सामना करने के बाद भारत बीते वर्ष सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने में कामयाब रहा है। इतना ही नहीं भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ा।
इतनी रही भारत की जीडीपी
कई बड़े फैसले घोटाले के कारण भारत की अर्थव्यवस्था ऊपर-नीचे हुई। लेकिन साल के खत्म होत-होते अर्थव्यवस्था संभलाने और ऊंचाईयों तक पहुंचने में भी कामयाब रहीं। आपको बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार का अनुमान जीडीपी की वृद्धि दर के आंकड़ों से लगाया जाता है। साल के पहले तीन महीने जनवरी से मार्च के दौरान भारत की जीडीपी 7.7 प्रतिशत रही थी। साथ ही वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 30 जून को समाप्त हुए पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.2 फीसदी रही थी।
इन कारणों से पड़ा भारत की जीडीपी पर असर
शुरूआती कुछ महीनों में जहां जीडीपी तेजी से बढ़ी वहीं सितंबर आते-आते जीडीपी कई कारणों से घट गई। जीडीपी ग्रोथ रेट 30 सितंबर को समाप्त दूसरी तिमाही में घटकर 7.1 फीसदी रह गई है। इसके बाद फिच रेटिंग ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट के अनुमान को 7.8 से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया है। ग्लोबल स्तर पर बात करें तो क्रूड के भाव, डॉलर की मजबूती, यूएस और चीन में ट्रेड वार से ग्लोबज ग्रोथ में सुस्ती और यूएस फेड द्वारा एक साल में चौथी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे कारणों से देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इसके अलावा भी कई और बातें है जिनके कारण जिनके भारत की जीडीपी रेट घटी या बढ़ी है।
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