उदयपुरवाटी में 31 दुल्हों की एक साथ निकली बारात तो देखने पहुंचे लोग
उदयपुरवाटी. मेघवंश जागृति संस्थान नीमकाथाना के तत्वावधान में कस्बे में रविवार को मेघवंश सामूहिक विवाह समिति उदयपुरवाटी की ओर से सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ। झुंझुनूं, सीकर और चूरू तीनों जिलों के हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में 31 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। सामूहिक विवाह सम्मेलन में अतिथि के रूप में पहुंचे पालिकाध्यक्ष पुष्पा सैनी, महंत कानदास, बाबूलाल रलावता, महेश कल्याण नीमकाथाना, तहसीलदार शंकराराम, गिरदावर जगत सिंह, शमरिन मंसूरी, बबीता राठी, राकेश वर्मा, नांगल सरपंच अर्जुनलाल वर्मा, रामप्रताप पुलकित, एईएन गिरधारीलाल वर्मा, पीएल वर्मा, पटवारी गिरधारीलाल, पार्षद बंसीधर राठी, रामेश्वर माहिच, रामेश्वर राठी, फुलचंद जमादार सहित अन्य अतिथियों द्वारा सम्मलेन परिणय सूत्र में बंधे जोड़ों को आशीर्वाद दिया। अतिथियों का मेघवंश सामूहिक विवाह समिति उदयपुरवाटी के अध्यक्ष मिठूराम राठी, जितेन्द्र राठी, नेतराम राठी, प्रदीप कनवा, मुकेश खरडिय़ा, मनोज कोटड़ी, पूर्णमल किरोड़ी, वेद प्रकाश वर्मा, सुरेश खरडिय़ा, श्रवण मेहरानियां सहित अन्य पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
31 दुल्हों की एक साथ निकली बारात को देखने पहुंचे लोग
सामूहिक विवाह सम्मेलन में आए सभी दुल्हों की एक साथ बारात निकाली गई। जमात से सभी दुल्हों को घोड़ी बैठाकर विवाह स्थल तक गाजे बाजे के साथ नाचते बारात निकाली गई। बारात में हाथी, ऊंट गाड़ी भी शामिल हुए। कस्बे में एक साथ निकली 31 दुल्हों की बारात को देखने के लिए लोग घरों के बाहर खड़े हो गए। उदयपुरवाटी में पहुंची सामूहिक बारात का पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दशरथ सिंह शेखावत, पार्षद अजय तसीड़, एडवोकेट मोतीलाल सैनी, प्रतिपक्ष नेता श्यामलाल सैनी, शक्तिसिंह शेखावत, सुरेन्द्र तंवर, मुकेश सहित कस्बे के लोगों ने स्वागत किया।
सांसी समाज की बैठक में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का किया निर्णय
नवलगढ़. जय सांसी समाज सुधार युवा एकता समिति की बैठक कस्बे के सूर्यमंडल में हुई। बैठक के मुख्य अतिथि राकेश कुमार बीदावत जयपुर थे। अध्यक्षता पूर्व पीआरओ सवाईसिंह मालावत ने की।
इस मौके पर समिति की कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें सुरेश कुमार बलवंतपुरा अध्यक्ष, रणजीत दादिया उपाध्यक्ष, भगवानाराम जेठी व विनोद कुमार मुकुन्दगढ़मंडी कोषाध्यक्ष, रामनिवास मास्टर निमेड़ा स्वतंत्र प्रभारी मंत्री, विजयपाल इन्द्रपुरा को महासचिव बनाया गया।
इस मौके पर मृत्यू होने पर बैंकुठी नहीं निकालने, लगन- टीके में अधिकतम 31 आदमी ही ले जाने, मृत्यूभोज पर पूर्णरूप से पाबंदी करने का निर्णय किया गया।कार्यक्रम का संचालन विजयपाल इन्द्रपुरा ने किया।






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