भीलवाड़ा।
राजमाता विजया राजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल के एक आदेश से कॉलेज व महात्मा गांधी अस्पताल में कार्यरत 32 कर्मचारियों पर गाज गिर गई। सभी को एक ही दिन में नौकरी से निकाल दिया। ये कर्मचारी अर्जेन्ट टेम्परेरी बेसिस (यूटीबी) पर लगे थे और नियमानुसार एक साल पूरा होने पर इन्हें हटा दिया गया।
दूसरी ओर बिना पूर्व सूचना दिए सीधे आदेश जारी कर एक साथ सभी को नौकरी से निकाल दिए जाने से कर्मचारियों में खलबली मच गई। उनका आरोप था कि उन्हें हटाने से पहले मौखिक सूचना नहीं दी गई। एेसे में सारे कर्मचारी एक ही दिन में बेरोजगार हो गए। गणतंंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी प्रिंसिपल डॉ. राजन नंदा की ओर से जारी किए गए एक आदेश ने यूटीबी के तहत लगे फिजियोथेरेपिस्ट, ओक्युपेशनल थेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट, मेडिकल सोशियल वर्कर, स्टोर कीपर, इसीजी टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष आदि को नौकरी से निकाल कर बेरोजगार कर दिया।
कर्मचारियों को जिस दिन आदेश जारी हुआ उस दिन तो भनक भी नहीं लगी। वे अगले दिन हंसी-खुशी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए। समारोह के बाद जब किसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आदेश को वायरल किया तो सभी कर्मचरियों में खलबली मच गई।
अस्पताल व कॉलेज में होगी अव्यवस्था
अचानक कर्मचारियों को हटा देने के बाद मेडिकल कॉलेज व महात्मा गांधी चिकित्सालय के कई विभागों में व्यवस्थाए पैदा हो जाएगी। पहले दिन सोमवार को भी लेबोरेट्री व ब्लड बैंक में कर्मचारियों पर भार बढ गया। सर्वाधिक कर्मचारी इन वार्डो में लगे होने से यहां कई काम अटक ते दिखे। वार्डों में भर्ती मरीजों को कर्मचारियों के अभाव में रक्त के नमूने देने के लिए स्वंय लैब में पहुंचना पड़ा। ब्लड बैंक में भी कर्मचारियों पर भार बढा। फिजियोथैरेपी व रिकार्ड रूम के भी हाल बेहाल दिखे। ईसीजी विभाग, दवा वितरण केन्द्र, मेडिकल कॉलेज पुस्तकालय व कार्यालय व स्टोर पर भी इसका बूरा प्रभाव पड़ेगा।
इनका कहना है
नौकरी जाने से बेरोजगार हुए यूटीबी पैरामेडिकल स्टॉफ यूनियन के पदाधिकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा से जयपुर में मिले। उन्हें कर्मचारियों की इस गंभीर समस्या से अवगत करा दिया है। उन्होंने जल्द ही उन्हें राहत पहुंचाने का आश्वासन दिया।
लोकेश शर्मा, महामंत्री, यूटीबी पैरामेडिकल स्टाफ यूनियन
कर्मचारियों को हटाना गलत है। संयुक्त कर्मचारी मजदूर महांसघ बेरोजगार हुए कर्मचारियों के हितों के लिए प्रयासरत है। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन करेंगे।
फरीद मोहम्मद रंगरेज, जिलाध्यक्ष, संयुक्त कर्मचारी मजदूर महासंघ
यूटीबी कर्मचारियों को एक साल से ज्यादा नहीं रख सकते है। जो कर्मचारी हटाए गए है उन्हें वापस रखने की प्रकिया के लिए सरकार को पत्र भेजा है। वहां से दो-चार दिन में जवाब आने के बाद ही इनका फैसला हो पाएगा।
डॉ. राजन नंदा, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज





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